केन्द्रीय पूल में 470 लाख टन से अधिक चावल का विशाल स्टॉक मौजूद
14-Oct-2025 12:31 PM
नई दिल्ली। तमाम योजनाओं, स्कीमों एवं कार्यक्रमों में भारी निकासी के बावजूद केन्द्रीय पूल में चावल का स्टॉक बढ़कर 470 लाख टन से ऊपर पहुंच गया है जिसमें धान की वह मात्रा भी शामिल है जिसकी मिलिंग से चावल प्राप्त होने वाला है।
यह स्टॉक बफर मात्रा से काफी अधिक है। इस बीच खरीफ कालीन धान की सरकारी खरीद आरंभ हो चुकी है जिससे आगामी महीनों में चावल का स्टॉक क्रमिक रूप से बढ़ता जाएगा।
हालांकि खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस), राज्यों को उसकी जरूरत के मुताबिक उदार आवंटन योजना, एथनॉल निर्माताओं को रियायती मूल्य पर बिक्री योजना तथा भारत चावल स्कीम आदि के अंतर्गत सरकार को अपने स्टॉक से रिकॉर्ड मात्रा में चावल की निकासी करने में सफलता मिल रही है लेकिन फिर भी केन्द्रीय पूल में इसका विशाल भंडार उपलब्ध है।
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ओएमएसएस के तहत चावल की बिक्री बढ़कर 56 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जो 2024-25 की बिक्री 46.30 लाख टन से काफी अधिक है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष (2025-26) की सम्पूर्ण अवधि के दौरान खुले बाजार बिक्री योजना के माध्यम से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को अपने स्टॉक से 60-70 लाख टन तक चावल की निकासी करने में सफलता मिल सकती है।
वर्तमान समय में केन्द्रीय पूल में 470 लाख टन से अधिक चावल का स्टॉक मौजूद है जो 1 अक्टूबर के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा 102.50 लाख टन से साढ़े तीन (3.5) गुणा ज्यादा है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इसमें मिलर्स से प्राप्त होने वाला 100 लाख टन चावल का स्टॉक भी शामिल है। राइस मिलर्स के पास इसके समतुल्य धान का स्टॉक मौजूद है।
चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 8 अक्टूबर 2025 के दौरान भारतीय खाद्य निगम द्वारा देश के एथनॉल निर्माताओं को 24.60 लाख टन, प्रांतीय स्तर के समाज कल्याण कार्यक्रमों के लिए 20.60 लाख टन, ओएमएसएस में ई-नीलामी के जरिए 10.30 लाख टन तथा भारत ब्रांड स्कीम के लिए 60 हजार टन चावल की आपूर्ति की गई
2024-25 की समान अवधि में इन सभी कार्यक्रमों के लिए कुल 46.30 लाख टन चावल का आवंटन किया गया था। उससे पूर्व इसकी मात्रा 2023-24 में 1540 लाख टन तथा 2022-23 में 17.80 लाख टन रही थी। खाद्य सब्सिडी में इजाफा होने की संभावना है।
