कपास की सरकारी खरीद आगे भी जारी रहेगी

26-Dec-2025 09:14 PM

नागपुर। विदेशों से रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा जल्दी ही समाप्त होने वाली है और अगर सरकार ने इसे आगे बढ़ाने के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की तो इस पर पुनः 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क लागू हो जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निम्न स्तरीय भाव होने के कारण भारत में विशाल मात्रा में सस्ती रूई का आयात हो रहा है।

इससे कपास के घरेलू बाजार मूल्य पर दबाव बना हुआ है और नतीजतन सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को किसानों से भारी मात्रा में इसकी खरीद करनी पड़ रही है। 

सरकारी एजेंसी द्वारा 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में 15 दिसम्बर 2025 तक लगभग 50 लाख गांठ कपास की खरीद की गई  जबकि मंडियों में इसकी कुल आवक 118 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) दर्ज की गई। निगम द्वारा 19 दिसम्बर तक कुल मिलाकर 230.33 लाख क्विंटल कपास की खरीद की गई

जिसके तहत तेलंगाना में 93.87 लाख क्विंटल तथा महाराष्ट्र में 47.69 लाख क्विंटल की खरीद भी शामिल है। इसके अलावा कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उड़ीसा एवं पंजाब जैसे राज्यों में भी किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अच्छी मात्रा में कपास की खरीद की गई। चूंकि कपास का थोक मंडी भाव एमएसपी से नीचे चल रहा है

इसलिए आगे भी इसकी सरकारी खरीद जारी रहेगी। कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2025-26 सीजन के दौरान बढ़ाकर मीडियम रेशेवाली श्रेणी के लिए 7710 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली किस्मों के लिए 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारण किया गया है। 

निगम के हस्तक्षेप से घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में गिरावट की प्रवृत्ति पर कुछ हद तक अंकुश लगा है और स्थिरता का माहौल बनने लगा है लेकिन जब तक थोक मंडी भाव घटकर एमएसपी तक नहीं पहुंचता तब तक इसकी सरकारी खरीद जारी रखनी पड़ेगी।