कपास के उत्पादन में गिरावट का सिलसिला बरकरार

26-Nov-2025 09:02 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है की देश में कपास का उत्पादन 2020-21 के सीजन में 352.48 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद 2021-22 के सीजन में घटकर 311.18 लाख गांठ रह गया लेकिन 2022-23 के सीजन में पुनः सुधरकर 336.60 लाख गांठ पर पहुंचा।

इसके बाद उत्पादन नियमित रूप से घटता जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कपास की पैदावार 2023-24 के सीजन में घटकर 325.22 लाख गांठ तथा 2024-25 के सीजन में गिरकर 297.24 लाख गांठ रह गयी। 2025-26 के वर्तमान सीजन में भी उत्पादन फिसलकर 292.15 लाख गांठ रह जाने का अनुमान है। 

कपास एक खरीफ कालीन औद्योगिक फसल है। कमजोर बाजार भाव के कारण इसकी खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घटता जा रहा है जिससे इसके बिजाई क्षेत्र में गिरावट का रुख बना हुआ है।

इस वर्ष दोनों प्रमुख उत्पादक राज्यों- गुजरात एवं महाराष्ट्र में कपास का रकबा घट गया और कई राज्यों में फसल को प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान भी हुआ। इसे देखते हुए सरकार ने 31 दिसम्बर 2025 तक कपास के आयात को सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया जिससे विदेशों से रूई का जोरदार आयात होने लगा।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव नरम रहने तथा सीमा शुल्क का भार नहीं होने से देश में सस्ती रूई का आयात तेजी से बढ़ने लगा जिससे कीमतों पर दबाव  पड़ रहा है।

कमजोर उत्पादन के बावजूद कपास का घरेलू बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहा है जिससे सरकारी एजेंसी भारतीय कपास निगम को किसानों से एमएसपी पर विशाल मात्रा में इसकी खरीद करनी पड़ रही है।