कपास उत्पादकता मिशन की समयावधि बढ़ने की संभावना
24-Nov-2025 11:52 AM
नई दिल्ली। भारत सरकार ने प्रस्तावित कपास उत्पादकता मिशन का कार्यकाल बढ़ाकर 10 वर्ष नियत करने का निर्णय लिया है जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने पहले इसकी समय सीमा 5 साल ही निर्धारित करने का सुझाव दिया था। समझा जाता है कि 5 वर्ष की समय सीमा को अपेक्षित परिणाम के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को इस मिशन के संचालित करने का दायित्व सौंपा गया है और अब यह संस्था इस मिशन को अंतिम रूप देने के लिए कृषि विभाग के इनपुट का इंतजार कर रही है। उल्लेखनीय है कि 2025-26 के केन्द्रीय आम बजट में इस मिशन की घोषणा की गई थी।
हालांकि इस मिशन को आरंभ करने में काफी देर हो गई है लेकिन समझा जाता है कि केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय इस मिशन के लिए आवंटित राशि का उपयोग जिनिंग इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए करने पर जोर दे रहा है।
ध्यान देने की बात है कि केन्द्रीय वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग कपास मंत्रालय के प्रस्ताव को पहले ही नामंजूर कर चुका है। नीति आयोग भी कपड़ा मंत्रालय के प्रस्ताव से सहमत नहीं है।
जब कपास उत्पादकता मिशन का कार्यकाल 5 वर्षों के लिए नियत होना था तब इसके लिए करीब 5000 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया था।
इसमें से लगभग 4000 करोड़ रुपए की राशि कृषि मंत्रालय द्वारा खर्चा किया जाना था। लेकिन यदि मिशन का कार्यकाल बढ़ाकर 10 वर्ष नियत किया गया तो इसके अनुरूप राशि का आवंटन भी बढ़ाना पड़ेगा
भारत में कपास की औसत उत्पादकता दर चीन, ब्राजील, अमरीका एवं ऑस्ट्रेलिया से ही नहीं बल्कि पाकिस्तान और बांग्ला देश से काफी नीचे रहती है।
