केरल में एक नए मसाला रूट नेटवर्क की शुरुआत
07-Jan-2026 08:42 PM
कोच्चि। जिस तरह अंग्रेजों के जमाने में भारत में नमक कर (सॉल्ट टैक्स) वसूला जाता था उसी तरह मध्य काल में जर्मनी में कालीमिर्च पर टैक्स लगाया गया था। कोलोन एवं स्पेयर जैसे कई जर्मन शहरों में कालीमिर्च पाने के लिए लोगों को टैक्स देना पड़ता था और वहां इस मसाले को काफी मूल्यवान माना जाता था।
रोम (इटली) में भी इस मसाले की भारी मांग रहती थी। केरल के तटवर्ती क्षेत्रों से दुनिया के विभिन्न भागों में कालीमिर्च भेजी जानी थी और इसे मसाला मार्ग (स्पाइस रूट) का नाम दिया गया था।
19 वीं शताब्दी में जंजीबार से भारत के बम्बई (अब मुम्बई) में भारी मात्रा में लौंग का आयात होता था जिसे भारत के उत्पादक क्षेत्रों में काफी जोखिम पूर्ण समझा जाता था।
केरल पर्यटन विभाग एवं मुजीरिस हैरिटेज प्रोजेक्ट द्वारा संयुक्त रूप से कोच्चि में आयोजित 'इंटरनेशनल स्पाइस रूट्स कांफ्रेंस में ऐसे अनेक मसाला मार्गों की चर्चा की गई जो प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक विदेशों में भारतीय संस्कृति की पहचान एवं पहुंच को सुनिश्चित तथा मजबूत बनाने में अहम योगदान दे रहे थे। इस कांफ्रेंस में अनेक विद्वानों एवं विशेषज्ञों ने इतिहास के पन्नो को दोबारा जीवंत बनाने का सफल प्रयास किया।
इस तीन दिवसीय महत्वपूर्ण कांफ्रेंस की थीम- है- "प्राचीन परिपाटी, नई यात्रा।" इसमें भारत से निर्यात होने वाले मसालों के महत्वपूर्ण एवं प्रचलित मार्गों की विस्तार से चर्चा की गई।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं भी होने की संभावना है। केरल सरकार पुराने मसाला मार्गों को दोबारा क्रियाशील बनाने की कोशिश कर रही है और इसके जरिए केरल पर्यटन क्षेत्र का विकास-विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
केरल में इंटरनेशनल स्पाइस रूट्स हैरिटेज नेटवर्क की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है और जिन देशों तक इसकी पहुंच होगी उन सबके साथ सामुद्रिक व्यापार के लिए करार किया जाएगा। इससे दोनों पक्षों को फायदा होगा।
