कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में तुवर के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी

01-Oct-2024 08:45 PM

नई दिल्ली । 24 सितम्बर तक के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान खरीफ सीजन में अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 46.50 लाख हेक्टेयर पहुंच गया जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 40.70 लाख हेक्टेयर से ज्यादा मगर सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य 49.38 लाख हेक्टेयर से कम रहा।

मार्च 2023 के मुकाबले 2024 के खरीफ सीजन के दौरान तुवर का रकबा कर्नाटक में 24 प्रतिशत उछलकर 15.80 लाख हेक्टेयर तथा महाराष्ट्र में 10 प्रतिशत बढ़कर 12.20 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। तुवर की नई फसल की कटाई-तैयारी दिसम्बर-जनवरी में आरंभ होगी। 

समीक्षकों के मुताबिक मौसम अनुकूल रहने, मानसून की भरपूर बारिश होने तथा बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊंचा रहने से किसानों को तुवर का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिला

तुवर का एमएसपी 7.90 प्रतिशत बढ़ाकर 7550 रुपए प्रति क्विंटल 1870 डॉलर (प्रति टन) नियत किया गया है जबकि घरेलू बाजार में न्यूतनम स्तर पर प्रचलित मूल्य भी 9000 रुपए प्रति क्विंटल (1041 डॉलर प्रति टन) से ऊंचा ही है। 

पिछले दो वर्षों से घरेलू उत्पादन कमजोर होने के कारण भारत को तुवर की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसकी मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर बढ़कर 12-15 लाख टन पर पहुंच गया जिसे पाटने के लिए विदेशो से भारी मात्रा में इसका आयात किया गया।

बिजाई क्षेत्र में 14 प्रतिशत का इजाफा होने से इस बार तुवर के उत्पादन में 5 लाख टन की बढ़ोत्तरी हो सकती है जिससे आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी।

केन्द्र सरकार ने तुवर, उड़द एवं मसूर की सम्पूर्ण विपणन योग्य मात्रा की खरीद करने का निर्णय लिया है जिससे किसानों को कम से कम एमएसपी मिलना निश्चित हो गया है। तुवर का आयात मुख्यत: म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों (मोजाम्बिक, मलावी, सूडान) आदि से होता है।