कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन एक दशक में नहीं रहा बेहतर
08-Oct-2024 02:06 PM
नई दिल्ली। हालांकि नीति आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक के दौरान कृषि एवं संबध क्षेत्रो का प्रदर्शन कुल मिलाकर बेहतर रहा लेकिन आकड़ो से पता चलता है कि वास्तविक विकास पशु धन, वानिकी, बागवानी एवं मत्स्य पालन क्षेत्र में हुआ जबकि मुख्य कृषि फसलों के उत्पादन में उतार-चढ़ाव बना रहा। रिपोर्ट के मुताबिक स्थिर मूल्य पर कृषि एवं संबध क्षेत्र की औसत विकास दर 1984-85 से 1993-94 के दशक में 2.9 प्रतिशत रही और 1994-95 से 2003-04 की अवधि में भी औसत वृद्धि दर में कोई बदलाव नहीं हुआ लेकिन उसके बाद विकास दर में अच्छी बढ़ोत्तरी होने लगी। वर्ष 2004-05 से 2013-14 तक केंद्र में यूपीए की सरकार थी और 2014-15 से 2023-24 तक एनडीए की सरकार रही। इन दोनों दशकों के दौरान कृषि क्षेत्र में अच्छी उन्नति-प्रगति दर्ज की गई। यूपीए के शासन में कृषि विकास दर 3.5 प्रतिशत रही जबकि एनडीए में ये कुछ और सुधरकर 3.7 प्रतिशत हो गई।
लेकिन दोनों के बीच अंतर यह रहा कि यूपीए के शासनकाल में जहां कृषि फसलों के उत्पादन में ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई वही एनडीए के शासन कल में जहां कृषि फसलों के उत्पादन में ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई वही एनडीए के शासन काल में संबध क्षेत्रो का अधिक विकास हुआ पिछले एक दशक के दौरान सरकार का मुख्य जोर डेयरी उत्पादन, वामिकी तथा मत्स्य पालन उत्पादन पर रहा जबकि एक खाद्यान्न, दलहन, तिलहन एवं कपास आदि के उत्पादन में बढ़ोत्तरी पर कम ध्यान दिया गया। इसके फलस्वरूप हाल के वर्षो में दलहनों एवं खाद्य तेलों के आयात में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है जबकि एक समय ऐसा लग रहा था कि दाल-दलहन के मामले में देश जल्दी ही आत्मनिर्भर हो जायेगा। मोटे अनाजों का उत्पादन एक निश्चित सीमा में स्थिर हो गया और कपास की पैदावार में भी अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी। लेकिन पशुधन एवं डेयरी विकास की हालत अच्छी रही।
