कृषि उत्पादों की आयात नीति को संतुलित रखने की जरूरत पर जोर

25-Nov-2025 06:10 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा है कि खाद्य एवं कृषि उत्पादों के लिए आयात की नीति ऐसी होनी चाहिए जिसमें किसानों एवं आम उपभोक्ताओं के हितों के बीच बेहतर संतुलन बना रहे ताकि किसी पक्ष को ज्यादा प्रभावित न होना पड़े। वर्तमान स्थिति जैसे हालत को उत्पन्न होने से रोकने के लिए यह आवश्यक है।

असंतुलित नीति के कारण अभी अनेक कृषि उत्पादों की कीमतों पर भारी दबाव बना हुआ है और किसानों को बेहतर आमदनी के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। आयात नीति की वजह से कृषि एवं खाद्य उत्पादों का दाम अक्सर बढ़ नहीं पाता है जिससे किसानों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। 

कृषि मंत्री के अनुसार देश में ऐसी नीति का अनुसरण किया जाता है जिसमें यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि दलहनों एवं तिलहनों जैसे उत्पादों का दाम उस स्तर तक न बढ़ सके जिससे आम आदमी को उसकी खरीद करने में कठिनाई हो। जब घरेलू उत्पादन प्रभावित होता है और विदेशों से विशाल मात्रा में सस्ते आयात की आवश्यकता पड़ती है तब कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए अक्सर आयात शुल्क में भारी कटौती कर दी जाती है। 

विदेशों से सस्ता आयात बढ़ने के साथ ही घरेलू बाजार भाव में नरमी आने लगती है और कई बार तो भाव घटकर इतना नीचे आ जाता है कि किसानों की आमदनी बुरी तरह प्रभावित होने लगती है।

भारतीय किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने हेतु उसके उत्पादों का लाभप्रद मूल्य दिलवाने की सख्त आवश्यकता है।

कृषि मंत्री के मुताबिक दलहनों की घटती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने हाल ही में पीली मटर के आयात पर 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा दिया है जो देसी चना का एक सस्ता विकल्प है।

इसके अलावा मसूर और देसी चना पर भी 10-10 प्रतिशत का आयात  शुल्क लगाया जा चुका है। चावल के निर्यात को पूरी तरह शुल्क मुक्त एवं नियंत्रण मुक्त किया जा चुका है और प्याज पर लगे निर्यात शुल्क को भी हटा लिया गया है।

यह सारे कदम सकारात्मक हैं लेकिन अभी कुछ और प्रयास करने की जरूरत है। दलहनों एवं खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए दलहनों एवं तिलहनों के उत्पादन संवर्धन को प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता है। सरकार उड़द, तुवर एवं मसूर की शत प्रतिशत खरीद का निर्णय पहले ही ले चुकी है।