खरीफ फसलों पर अधिशेष वर्षा का सीमित प्रतिकूल असर पड़ने का कृषि मंत्री का अनुमान

16-Sep-2024 02:30 PM

नई दिल्ली । हालांकि देश के कई भागों में भारी वर्षा, भयंकर बाढ़ एवं खेतों में जल भराव के कारण खरीफ फसलों को काफी क्षति होने की आशंका है मगर केन्द्रीय कृषि मंत्री का मानना है कि कुल मिलाकर 1-2 प्रतिशत फसल ही इससे प्रभावित हुई है।

खरीफ फसलों की बिजाई प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है और कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से कुछ अधिक रहा है। धान, दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों का रकबा बढ़ा है मगर कपास के क्षेत्रफल में कमी आई है।

कृषि मंत्री के मुताबिक खरीफ फसलों की पैदावार पर अवशेष वर्षा का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

कृषि मंत्री के अनुसार चालू खरीफ सीजन में विभिन्न फसलों की बिजाई उत्साहवर्धक रही है और खरीफ फसलों के सकल उत्पादन में कुल मिलाकर बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।

उद्योग-व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि अगले दो सप्ताहों के दौरान होने वाली बारिश इन फसलों के परिदृश्य के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। 

पिछले सप्ताह तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 1092.30 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष से 2.15 प्रतिशत ज्यादा और सामान्य औसत क्षेत्रफल 1096 लाख हेक्टेयर 99.7 प्रतिशत था।

धान, तिलहन एवं मोटे अनाजों का रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से ऊपर पहुंच चुका है। खरीफ फसलों की उपज दर क्वालिटी एवं कुल पैदावार के लिए सितम्बर अंत की वर्षा पर गहरी नजर रखे जाने की आवश्यकता हैं। 

मानसून सीजन के दौरान देश में दीर्घकालीन औसत से 8.3 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। देश के 729 से अधिक जिलों में से करीब 75 जिलों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हुई है।

दक्षिणी प्रायद्वीप एवं मध्यवर्ती भारत में सामान्य औसत से क्रमश: 23.4 प्रतिशत एवं 18.9 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है।

इससे धान का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 409.50 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 401.50 लाख हेक्टेयर से 8 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। मानसून की अधिशेष बारिश से दलहन, तिलहन एवं कपास की फसल को विशेष नुकसान होने की आशंका है।