खरीफ कालीन धान की खेती पर अल नीनो का खतरा
23-Apr-2026 05:35 PM
नई दिल्ली। देश के अधिकांश भागों में तापमान तेजी से बढ़ने लगा है और कई इलाकों में गर्म हवा की तेज लहर या हीटवेव (लू) का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है। इससे खेतों की मिटटी से नमी तेजी से गायब हो रही है और उसमें दरारें पड़ने लगी हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ की दो अधीनस्थ एजेंसियों द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इस वर्ष मानसून की हालत कमजोर रह सकती है जिससे धान सहित अन्य खरीफ फसलों की खेती एवं प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के दो अधीनस्थ एजेंसियों- खाद्य एवं कृषि संगठन (फाओ) तथा विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष भारत में चावल उत्पादन के लिए गंभीर संकट पैदा हो सकता है और खेतिहर मजदूरों की आजीविका पर खतरा बढ़ सकता है। भविष्य में भी गंगा-सिंधु के मैदानी भाग में गर्मी का सबसे ज्यादा जोखिम रहा सकता है।
भारत दुनिया में चावल का सबसे अग्रणी निर्यातक एवं उत्पादक देश है और विशाल मात्रा में यहां इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की घरेलू खपत होती है। देश में करीब 80-85 प्रतिशत चावल का उत्पादन खरीफ या मानसून सीजन में होता है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में भारत के विभिन्न राज्यों में भयंकर गर्मी पड़ी थी और अधिकतम तथा न्यूनतम तापमान में असाधारण इजाफा हो गया था।
इसके फलस्वरूप पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार तथा महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में प्रमुख कृषि फसलों के साथ-साथ फलों, सब्जियों एवं बागानी उत्पादों का उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था। चालू वर्ष के दौरान मानसून की वर्षा कम होने की संभावना है।
