खाद्य तेलों एवं चीनी की घरेलू खपत में गिरावट आने के संकेत

07-Jul-2025 11:38 AM

मुम्बई। विभिन्न कारणों से पिछले दो तीन माह के दौरान देश में खाद्य तेलों एवं चीनी की खपत में गिरावट आई है। इन कारणों में मौसम की हालत, कीमतों में बदलाव, शरीरिक फिटनेस के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता एवं खाद्य शैली में हो रहा परिवर्तन आदि शामिल है।

उद्योग-समीक्षकों के अनुसार सरकारी स्तर पर भी देश में खाद्य तेल, चीनी तथा नमक की खपत घटाने के लिए जोरदार अभियान चलाया जा रहा है और 21 जून को योग दिवस पर स्वयं प्रधानमंत्री ने लोगों से तंदरुस्त (फिट) रहने के लिए खाद्य तेलों के उपयोग में 10 प्रतिशत की कटौती करने की अपील की थी। 

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में प्रति व्यक्ति खपत का औसत वार्षिक आंकड़ा खाद्य तेलों के लिए 18 किलो तथा चीनी के लिए 20 किलो की ऊंचाई पर पहुंच चुका है

जो न केवल संसार के अधिकांश देशों से ज्यादा है बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित स्तर से भी काफी अधिक है। इससे देश में मोटापा बढ़ने का ज्यादा मामला सामने आ रहा है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अप्रैल 2025 के चार महीनों के दौरान देश में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले खाद्य तेलों के आयात में भारी गिरावट आई

और मई में भी यह 2.2 प्रतिशत गिरकर 11.78 लाख टन पर अटक गया। इससे पूर्व अप्रैल में भी खाद्य तेलों के आयात में 32 प्रतिशत की जोरदार गिरावट दर्ज की गई थी। 

जहां तक चीनी का सवाल है तो जून माह के लिए सरकार ने 23 लाख टन चीनी की घरेलू  बिक्री का कोटा जारी किया था मगर इसमें से करीब 22 लाख टन का ही उपयोग हो सका और एक लाख टन से कुछ अधिक चीनी का स्टॉक अनबिका रह गया। मालूम हो कि जून 2024 में 25.50 लाख टन चीनी का फ्रीसेल कोटा आवंटित हुआ था और उसकी पूरी मात्रा बिक गई थी।

अधिकारियों का कहना है कि 20 जुलाई के बाद ही पता चलेगा कि जून में चीनी का कितना स्टॉक अनबिका रह गया क्योंकि इस समय तक सभी मिलर्स अपने कोटे की बिक्री का विवरण सरकार के पास भेज देंगे। 

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि गर्मी के महीनों में आमतौर पर खपत कम होती है। फरवरी से तापमान बढ़ने लगता है और खपत घटने लगती है।

कुछ कंपनियों द्वारा ग्राम में वजन की दृष्टि से कम मात्रा में खाद्य तेलों की बिक्री की जा रही है। इससे भी कुछ खपत पर असर पड़ा है। अप्रैल-जून 2025 की तिमाही में खाद्य तेल की कई कंपनियों के माल की बिक्री में गिरावट आ गई।