खाद्य तेल कंपनियों को खुदरा मूल्य नहीं बढ़ाने का निर्देश

18-Sep-2024 03:26 PM

नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने खाद्य तेल के प्रोसेसर्स से तत्काल अपने ब्रांडेड उत्पादों का उच्चतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) नहीं बढ़ाने के लिए कहा है।

उसका कहना है कि देश में निम्न स्तरीय सीमा शुल्क पर पूर्व में आयातित खाद्य तेलों का भरपूर स्टॉक मौजूद है जिसे सामान्य मूल्य स्तर पर बेचा जाना चाहिए।

खाद्य तेलों पर 13 सितम्बर को आयात शुल्क में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है जबकि अगस्त के बचे हुए स्टॉक तथा सितम्बर के दूसरे सप्ताह तक हुए आयात पर पुराना सीमा शुल्क ही लागू था इसलिए इसका दाम बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।

खाद्य मंत्रालय के अनुसार खाद्य तेलों का पुराना स्टॉक अगले 45-50 दिनों में समाप्त होगा। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में की गई बढ़ोत्तरी का उद्देश्य स्वदेशी तिलहन उत्पादकों को सहयोग-समर्थन देना है। खरीफ कालीन तिलहन फसलों की आवक अगले महीने से जोर पकड़ने लगेगी। 

14 सितम्बर से खाद्य तेलों पर बुनियादी आयात शुल्क में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का निर्णय प्रभावी हुआ है। इसके फलस्वरूप क्रूड श्रेणी के पाम तेल,

सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल पर कुल आयात शुल्क बढ़कर 27.5 प्रतिशत तथा रिफाइंड संवर्ग के खाद्य तेलों पर कुल वास्तविक आयात शुल्क बढ़कर 35.75 प्रतिशत हो गया है।

इससे पूर्व क्रूड खाद्य  तेलों पर 5.5 प्रतिशत एवं रिफाइंड खाद्य तेलों पर 12.5 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ था। 

17 सितम्बर को केन्द्रीय खाद्य सचिव के साथ तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी), इंडियन वैजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) तथा सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इसमें खाद्य तेल की कीमतों की रणनीति पर चर्चा की गई और सरकार की ओर से उद्योग संगठनों को निकट भविष्य में खाद्य तेलों का उच्चतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पुराने स्तर पर स्थिर रखने के लिए कहा गया।