खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए सोयाबीन की उपज दर में वृद्धि होना आवश्यक
14-Oct-2024 08:23 PM
इंदौर । केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग- मंत्री ने कहा है कि यदि भारत को खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करनी है तो सोयाबीन की प्रति एकड़ औसत उत्पादकता में अपेक्षित बढ़ोत्तरी होना आवश्यक है।
हालांकि उत्पादन की मात्रा की दृष्टि से सोयाबीन देश की सबसे प्रमुख तिलहन फसल है लेकिन इसकी उपज दर अनेक देशों की तुलना में काफी पीछे है।
मंत्री महोदय का कहना था कि इंडोनेशिया एवं मलेशिया से विशाल मात्रा में पाम तेल का आयात हो रहा है और इसके आयात पर तेजी से बढ़ती निर्भरता को तभी कम किया जा सकता है जब सोयाबीन की खेती को पर्याप्त बढ़ावा दिया जाए और स्वदेशी स्रोतों से खाद्य तेलों के उत्पादन में भारी बढ़ोत्तरी संभव हो सके।
इंदौर में आयोजित 7 वें इंटरनेशनल सोया कॉनक्लेव को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सम्बोधित करते हुए राजमार्ग मंत्री ने कहा कि भारत को खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोयाबीन की उपज दर में इजाफा करने की सख्त जरूरत है और इसके साथ-साथ सोयाबीन का उत्पादन खर्च घटना भी आवश्यक है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है जिसमें क्रूड पाम तेल, क्रूड सोयाबीन तेल, क्रूड सूरजमुखी तेल, आरबीडी पामोलीन तथा क्रूड पाम कर्नेल तेल मुख्य रूप से शामिल है।
सड़क परिवहन मंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि केन्द्र सरकार सोयाबीन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने हेतु राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के माध्यम से अनेक कदम उठा रही है जिसमें इस महत्वपूर्ण तिलहन फसल की उन्नत किस्म के बीजों का विकास करना भी शामिल है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार तथा उद्योग के संयुक्त प्रयास एवं किसानों के अथक परिश्रम से भारत खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में निरन्तर आगे बढ़ता रहेगा।
उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल सोया कॉनक्लेव का आयोजन इंदौर स्थित एक महत्वपूर्ण संस्था- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) द्वारा 13 अक्टूबर को शुरू किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 800 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।
