खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में वृद्धि होने से तिलहनों का भाव सुधरने के आसार
17-Sep-2024 05:59 PM
मुम्बई । खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई समाप्त होने के बाद अब इसकी कटाई-तैयारी का समय आ गया है। सोयाबीन का थोक मंडी भाव पहले ही घटकर काफी नीचे आ गया था जबकि नए माल की जोरदार आवक शुरू होने पर उसमें और गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही थी।
इससे किसानों के साथ सरकार की चिंता भी बढ़ गई थी। तब किसानों एवं तेल उद्योग की जोरदार मांग को देखते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने खाद्य मंत्रालय को विश्वास में लेते हुए खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने का एक प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास भेजा और वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी। इससे आयात महंगा हो जाएगा और स्वदेशी क्रशिंग-प्रोसेसिंग उद्योग को किसानों से ऊंचे दाम पर तिलहन खरीदने का प्रोत्साहन मिलेगा।
सरसों का थोक मंडी भाव हाल के सप्ताहों में काफी तेज हुआ है और सरसों तेल की कीमत भी काफी बढ़ गई है। इसके पीछे-पीछे अब सोयाबीन एवं मूंगफली के दाम में सुधार आने के संकेत मिलने लगे हैं।
हालांकि सरकार ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन खरीदने की अनुमति प्रदान कर दी है लेकिन उसका इरादा यह है कि उद्योग-व्यापार क्षेत्र ही किसानों से इसकी अधिक से अधिक खरीद करे।
अगस्त में पाम तेल एवं सूरजमुखी तेल का कम आयात होने से खाद्य तेलों के कुल आयात में गिरावट आ गई। सरकार को उम्मीद है कि नए माल की जोरदार आवक होने के बावजूद सोयाबीन का भाव आगामी समय में मजबूत रह सकता है।
इस महत्वपूर्ण तिलहन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4600 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 4892 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है। मूंगफली के समर्थन मूल्य में भी इजाफा हुआ है। इन दोनों तिलहन-फसलों के बिजाई में इस बार अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है।
