ला नीना की सक्रियता कुछ महीनों तक कायम रहने की संभावना
18-Nov-2025 04:04 PM
तिरुअनन्तपुरम । ला नीना का समय काल इस बार काफी छोटा रहने का अनुमान है और इसकी तीव्रता भी सीमित रहने की संभावना है। अपेक क्लाइमेट सेंटर का अल नीनो- सॉदर्न ऑसिलेशन अलर्ट सिस्टम अब दोबार निष्क्रिय हो गया है जबकि पहले यह ' ला नीना वाच' की श्रेणी में था। इसका मतलब यह हुआ कि ला नीना की स्थिति का मौजूदा समय काल अगले कुछ महीनों में समाप्त हो सकता है।
कोरिया के जलवायु संस्थान का कहना है कि, दिसम्बर-फरवरी के दौरान अल नीनो-सॉदर्न ऑसिलेशन की स्थिति के उदासीन (न्यूट्रल) होने का 53-54 प्रतिशत संभावना है जो मार्च-मई 2026 में बढ़कर 60 प्रतिशत से ऊपर पहुंच जाने की उम्मीद है।
दिसम्बर 2025 में यह ऑसिलेशन (-) 0.76 डिग्री सेल्सियस रहने के आसार हैं जबकि मई 2026 तक बढ़कर 047 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
इस तरह यह ऋणात्मक पोजीशन से बाहर निकलकर घनात्मक श्रेणी में आ जाएगा और इसलिए ला नीना मौसम चक्र की गतिशीलता एवं तीव्रता बेहद सुस्त या शिथिल हो जाएगी।
ध्यान देने की बात है कि यह ऑसिलेशन प्रशांत महासागर में अल नीनो तथा ला नीना की बीच वाली स्थिति होती है जो आमतौर पर न्यूट्रल रहती है। जब इसमें असंतुलन पैदा होता है तब दोनों में से किसी एक मौसम चक्र के सक्रिय होने की आशंका बढ़ जाती है।
ला नीना मौसम चक्र के प्रभाव से भारत सहित दक्षिण एशिया के अन्य देशों तथा ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में बारिश का अभाव रहता है मगर ब्राजील अर्जेन्टीना सहित अन्य निकटवर्ती देशों में जोरदार वर्षा की संभावना रहती है।
अक्टूबर से जनवरी तक भारत में रबी फसल की बिजाई एवं प्रगति का समय रहता है। इस अवधि में हल्की या सामान्य वर्षा की जरूरत पड़ती है। चूंकि ला नीना मौसम चक्र कमजोर रहेगा इसलिए भारत पर असर पड़ने की संभावना बहुत कम है।
