ला नीना से दिसम्बर-जनवरी में हो सकती है भारी वर्षा

10-Oct-2025 03:18 PM

नई दिल्ली। दो वैश्विक मॉडल्स से संकेत मिलता है कि ला नीना मौसम चक्र के प्रभाव से भारत में दिसम्बर-जनवरी के दौरान अच्छी वर्षा हो सकती है।

प्रशांत महासगार से इसकी उत्पत्ति के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो गई हैं। ध्यान देने की बात है कि ला नीना अक्सर अपने साथ बारिश लाती है जबकि इसके विपरीत अल नीनो से सूखा पड़ने की आशंका रहती है। 

ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो तथा अमरीकी जलवायु पूर्वानुमान केन्द्र का कहना है कि इस वर्ष दिसम्बर के प्रथम पखवाड़े में ला नीना मौसम चक्र का आगमन हो सकता है और यह दिसम्बर-जनवरी में सक्रिय रहने के बाद फरवरी के अंत तक समाप्त हो सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो (बोम) के अनुसार मौजूदा मॉडल से पता चलता है कि ट्रॉपिकल महासगार में 23 सितम्बर से 23 दिसम्बर के दौरान जल का तापमान ला नीना की उत्पत्ति के स्तर तक पहुंच सकता है

और दिसम्बर से फरवरी के बीच यह न्यूट्रल रूप में रहता है। प्रशांत महासागर में धरातल का पानी आगामी समय में कुछ और ठंडा हो सकता है जिससे ग्रीष्म काल के दौरान ला नीना की उत्पत्ति के लिए आदर्श स्थिति बन सकती है। 

यह आदर्श स्थिति अब भी मौजूद है लेकिन ला नीना की तीव्रता ज्यादा नहीं है। यह तीव्रता दिसम्बर में बढ़ सकती है। इसके प्रभाव से एशिया के कई देशों और खासकर भारत में कहीं-कहीं मूसलाधार बारिश होने तथा बाढ़ आने की आशंका रहेगी जो रबी फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

रबी फसलों की बिजाई अक्टूबर से दिसम्बर के बीच ज्यादा होती है जबकि इसका सिलसिला जनवरी में भी बरकरार रहता है। दिसम्बर तक धान, तुवर एवं अरंडी को छोड़कर अन्य खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी पूरी हो जाती है इसलिए उसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं है।