मांग एवं आपूर्ति के समीकरण में बदलाव होने से चीनी का भाव मजबूत रहने के आसार

25-Sep-2024 02:02 PM

नई दिल्ली । अनेक महीनों तक अनिश्चितता का माहौल बरकरार रहने के बाद चीनी उद्योग एक बार फिर बाजार में तेजी आने की उम्मीद कर रहा है।

एक तरफ 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में चीनी का उत्पादन कुछ कम होने का अनुमान है क्योंकि एथनॉल निर्माण में गन्ना के मुक्त उपयोग की अनुमति प्रदान की गई है तो दूसरी ओर घरेलू प्रभाग में इसकी मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती जा रही है। अगले महीने से गन्ना की क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का नया मार्केटिंग सीजन आरंभ होने वाला है। 

उद्योग समीक्षकों के अनुसार 30 सितम्बर को समाप्त होने वाले 2023-24 के मार्केटिंग सीजन के अंत में मिलर्स के पास करीब 80-90 लाख टन चीनी का पिछला बकाया (अधिशेष) स्टॉक मौजूद रहेगा जो 2022-23 सीजन की समाप्ति की समय उपलब्ध स्टॉक 57 लाख टन से काफी अधिक है।

इसके फलस्वरूप 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में 2023-24 सीजन के मुकाबले करीब 58 प्रतिशत चीनी का अधिक बकाया स्टॉक मौजूद होगा और यदि उत्पादन में कमी आई तो इस अतिरिक्त स्टॉक से उसकी भरपाई आसानी से हो सकती है। 

लेकिन 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में चीनी के उत्पादन एवं उपयोग के बीच अंतर में कमी आएगी और बाजार पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।

यदि चीनी का उत्पादन 10 लाख टन तक घटकर 310 लाख टन पर अटकता है और इसका उपयोग बढ़कर 290-292 लाख टन पर पहुंचता है तो दोनों के बीच 18-20 लाख टन का अंतर रह सकता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि चीनी के व्यापारिक निर्यात पर जून 2023 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है जबकि सरकार पर इसे हटाने के लिए उद्योग द्वारा भारी दबाव डाला जा रहा है।

उद्योग चाहता है कि यदि प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटे तो कम से कम 15-20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति मिल जाए। वैसे सरकार फिलहाल इसका निर्णय लेने से परहेज कर रही है।

चीनी का घरेलू बाजार भाव एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य से ऊंचा मगर लागत खर्च से कुछ नीचे चल रहा है। सरकार इस न्यूनतम बिक्री मूल्य में कुछ इजाफा करने पर विचार कर रही है जिसका आंशिक रूप से मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है।