महंगे आयात से तमिलनाडु में खाद्य तेल का भाव ऊंचा
04-May-2026 04:00 PM
चेन्नई। देश के दक्षिणी राज्य- तमिलनाडु में विदेशों से आयातित खाद्य तेलों और खासकर सूरजमुखी तेल तथा पाम तेल का भाव ऊंचा और तेज चल रहा है। लोकल नारियल तेल का दाम भी ऊंचे स्तर पर मजबूत बना हुआ है। इससे आम लोगों की रसोई का खर्च बढ़ गया है और छोटे कारोबारियों को व्यवसाय करने में दिक्कत हो रही है। पश्चिम एशिया में ईरान-अमरीका के बीच तथा काला सागर क्षेत्र में रूस - यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण खाद्य तेलों का आयात खर्च बढ़ गया है जिससे घरेलू बाजार पर भी सीधा गहरा असर पड़ रहा है।
हाल के सप्ताहों के दौरान विभिन्न खाद्य तेलों के खुदरा मूल्य में कम से कम 15-20 रुपए प्रति लीटर का भारी इजाफा दर्ज किया गया है। ज्ञात हो कि भारत की निर्भरता विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर बढ़कर 55-60 प्रतिशत के बीच पहुंच गई है इसलिए जब आयात महंगा होता है तब घरेलू बाजार भाव स्वभाविक रूप से बढ़ जाता है। भारत में पाम तेल का आयात मुख्यतः इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड से तथा सूरजमुखी तेल का आयात रूस, यूक्रेन एवं अर्जेन्टीना से होता है। अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से सोयाबीन तेल मंगाया जाता है।
थोक विक्रेताओं के अनुसार ब्रांडेड सूरजमुखी तेल का भाव पहले 155 रुपए प्रति लीटर चल रहा था जो अब 175 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कुछ नामी-गिरामी कंपनियों के ब्रांडेड सूरजमुखी तेल का खुदरा मूल्य उछलकर 200 रुपए प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गया है। इसी तरह पाम तेल का दाम भी 15 रुपए की वृद्धि के साथ 135-140 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
इस मूल्य वृद्धि से आम लोगों को भारी कठिनाई हो रही है। हालांकि अन्य खाद्य जिंसों की कीमत भी तेज हुई है मगर सबसे ज्यादा परेशानी खाद्य तेलों का दाम बढ़ने से हो रही है। यदि यही स्थिति रही तो मध्यम वर्ग पर जबरदस्त भार पड़ सकता है। इस मूल्य वृद्धि से खाद्य कारोबार में शामिल छोटे-छोटे ऑपरेटर्स-होटल, रेस्तरां, ढाबा एवं स्नैक दुकानदारों की चिंता और कठिनाई भी बढ़ गई है। ये ऑपरेटर्स पाम तेल पर काफी निर्भर रहते हैं।
कमर्शियल एलपीजी के अभाव एवं ऊंचे दाम के कारण अनेक खाद्य पदार्थों का दाम पहले ही 20 प्रतिशत तक बढ़ चुका है जबकि अब ऑपरेटर्स को खाद्य तेल की वजह से अपने उत्पाद का दाम बढ़ाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
