महाराष्ट्र में 25 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती शुरू करने की योजना
26-Dec-2025 11:19 AM
पुणे। महाराष्ट्र सरकार ने प्राकृतिक खेती के मिशन को गतिशील एवं सघन बनाने का निर्णय लिया है ताकि कृषि फसलों की उत्पादकता एवं क्वालिटी में सुधार लाने और मिटटी की उर्वरा शक्ति को बरकरार रखने में सहायता मिल सके।
इसके तहत राज्य में 25 लाख हेक्टेयर में अगले दो वर्षों के दौरान प्राकृतिक विधि से फसलों की खेती आरंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। इन फसलों के लिए रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशी रसायनों का उपयोग नहीं या नगण्य किया जाएगा।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य सरकार इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि इससे किसानों को काफी फायदा होगा और मिटटी का स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहेगा। मृदा अपरदन की रोकगाम में प्राकृतिक कृषि प्रणाली काफी लाभदायक साबित होगी।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है जब कृषि क्षेत्र अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है। इसमें मिटटी की घटती उर्वरता, लागत खर्च में हो रही बढ़ोत्तरी और जलवायु परिवर्तन का खतरा आदि शामिल हैं।
इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान महाराष्ट्र में अत्यधिक बारिश होने तथा खेतों में लम्बे समय तक पानी का जमाव रहने से खरीफ फसलों को काफी नुकसान हुआ जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई।
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्राकृतिक खेती के साथ-साथ चक्रीय अर्थ-व्यवस्था का तेज विकास भी आवश्यक है। इसमें संस्थागत भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी।
इन दोनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर कृषि क्षेत्र में हरित रोजगार का सृजन संभव हो सकेगा तथा खाद्य प्रसंस्करण एवं सम्बद्ध क्षेत्रों का त्वरित विकास हो सकेगा।
महाराष्ट्र में दलहन, तिलहन, मोटे अनाज एवं कपास सहित कई अन्य फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। वह चीनी का प्रमुख उत्पादक राज्य है जबकि सोयाबीन एवं कपास के उत्पादन में दूसरे नम्बर पर रहता है।
