महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र सामान्य औसत क्षेत्रफल से ऊपर पहुंचा
06-Sep-2024 01:43 PM
मुम्बई । इस वर्ष महाराष्ट्र में सही समय पर मानसून की अच्छी बारिश होने तथा मौसम एवं बाजार की हालत अनुकूल रहने से खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र सामान्य औसत क्षेत्रफल के सापेक्ष 102 प्रतिशत पर पहुंच गया।
इतना ही नहीं बल्कि राज्य में वर्ष 2018 के बाद पहली बार प्रमुख बांधों एवं जलाशयों में पानी का स्तर बढ़कर भंडारण क्षमता तक पहुंच गया।
इससे रबी फसलों की सिंचाई के लिए वहां पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकता है। साथ ही साथ ही राज्य सरकार ने सिंचाई साधनों के लिए सब्सिडी की राशि में भारी बढ़ोत्तरी की घोषणा भी की है।
महाराष्ट्र में इस बार दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष 21 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। कृषि विभाग के अनुसार 1 जून से 2 सितम्बर 2024 के दौरान राज्य में 1002 मि०मी० वर्षा दर्ज की गई।
पिछले साल वहां सामान्य औसत की तुलना में केवल 81.4 प्रतिशत बारिश हुई थी क्योंकि जुलाई के तीसरे सप्ताह से लेकर अगस्त के तीसरे सप्ताह तक मानसून कमजोर पड़ गया था।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष खरीफ फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 142.02 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि इसका वास्तविक उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 144.92 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
राज्य के सिर्फ पांच तालुका में 50-75 प्रतिशत वर्षा हुई जबकि 305 तालुकाओं में 100 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई।
महाराष्ट्र में कपास, सोयाबीन, अरहर, मूंग, मक्का, गन्ना एवं धान आदि खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इसी तरह वहां हल्दी का भारी उत्पादन होता है।
पिछले साल महाराष्ट्र में जुलाई-अगस्त के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के निष्क्रिय होने से वर्षा का भारी अभाव महसूस किया गया था और लगभग सूखे का माहौल पैदा हो गया था।
कर्नाटक में स्थिति और भी खराब हो गई थी। उसके विपरीत इस बार महाराष्ट्र में जल प्रलय का नजारा देखा जा रहा है। भारी वर्षा एवं बाढ़ की वजह से कुछ क्षेत्रों में खरीफ फसलों को नुकसान होने की सूचना भी मिल रही है।
