महाराष्ट्र में मुख्य फसलों के साथ-साथ चारा उत्पादन पर भी जोर देने की सलाह

18-Jun-2026 01:28 PM

मुम्बई। महाराष्ट्र सरकार ने इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव तथा कमजोर मानसून की संभावना को देखते हुए राज्य के किसानों को दलहन, तिलहन एवं कपास सहित अन्य मुख्य फसलों के साथ-साथ चारे की फसल के लिए भी विशेष प्लान बनाने का सुझाव दिया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश कम होने पर राज्य में हरे चारे का अभाव हो सकता है जिससे किसानों एवं पशुपालकों की कठिनाई बढ़ जाएगी। इस समस्या से निपटने के लिए चारे की फसल उगाने पर किसानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। 

पशुपालन आयुक्त का कहना है कि निकट भविष्य में चारे के अभाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। पशुधन एवं दुग्ध उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े, इसके लिए महाराष्ट्र के सभी पशुपालकों को अभी से सावधान रहने तथा चारा उत्पादन पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया जा रहा है।

उन्हें पौष्टिक एवं बहुउद्देश्यीय चारा फसलों की खेती करने की सलाह दी गई है ताकि गाय-भैंस सहित अन्य पशुओं का अच्छा स्वास्थ्य बरकरार रखा जा सके। हालांकि मुख्य फसलों से भी चारा प्राप्त किया जा सकता है। इसमें ज्वार-बाजरा तथा गन्ना आदि शामिल है। चारा फसलों का  अधिशेष उत्पादन होने पर उसका सुरक्षित भंडारण किया जाना चाहिए। 

महाराष्ट्र में इस वर्ष 15 जून तक मानसून की बारिश सामान्य औसत से करीब 75 प्रतिशत कम हुई तथा आगे भी वर्षा की स्थिति में ज्यादा सुधार आने की उम्मीद कम है। मानसून अभी पूर्वी क्षेत्र की ओर सक्रिय हो रहा है जिससे महाराष्ट्र एवं गुजरात जैसे पश्चिमी राज्यों में बारिश का भारी अभाव देखा जा रहा है। महाराष्ट्र में तुवर, सोयाबीन, कपास एवं गन्ना के साथ-साथ मोटे अनाजों का भी भारी उत्पादन होता है।