महाराष्ट्र में सोयाबीन का घटता भाव चुनाव को कर सकता है प्रभावित
18-Nov-2024 12:34 PM
नागपुर । देश के दूसरे सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र में सोयाबीन का थोक मंडी भाव लगभग नीचे की ओर खसकता जा रहा है जिससे खासकर विदर्भ तथा मराठवाड़ा संभाग के किसान बेहद चिंतित और परेशान हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि यदि महायुति की सरकार दोबारा सत्ता में आई तो महाराष्ट्र किसानों से 6000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से सोयाबीन की खरीद की जाएगी लेकिन किसान इससे ज्यादा आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं।
सोयाबीन के नए माल की जोरदार आवक पहले ही शुरू हो चुकी है और छोटे-छोटे किसानों को काफी नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचे के लिए विवश होना पड़ रहा है।
केन्द्र सरकार ने सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पिछले साल के 4600 रुपए प्रति क्विंटल से 292 रुपए या 6.3 प्रतिशत बढ़ाकर इस वर्ष 4892 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया है मगर इसका मंडी भाव इससे करीब 500-700 रुपए प्रति क्विंटल नीचे चल रहा है।
मालूम हो कि महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवम्बर को मतदान होगा और 23 नवम्बर को इसके नतीजे सामने आएंगे। मराठवाड़ा एवं विदर्भ संभाग में विधानसभा की 70 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां सोयाबीन उत्पादकों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। विपक्षी पार्टियों ने चुनावी मुद्दा बनाया।
यह ठीक उसी प्रकार रहा जिस तरह लोक सभा चुनाव के दौरान वहां प्याज का मुद्दा उछाला गया था और उससे महाविकास अघाड़ी को काफी फायदा भी हुआ था।
महाराष्ट्र एवं विदर्भ संभाग में अनेक जिलों में सोयाबीन का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। इस वर्ष भी वहां इसकी अच्छी बिजाई हुई और प्राकृतिक आपदाओं से फसल को सीमित नुकसान होने के बावजूद राज्य में उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद की जा रही है।
किसानों को इस बार सोयाबीन से अच्छा मुनाफा मिलने का भरोसा था क्योंकि सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत बढ़ा दिया है।
लेकिन इसके बावजूद कीमतों में नरमी का दौर जारी रहा जिससे किसान काफी मायूस हो गए हैं। महाराष्ट्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीद के लिए क्रय केन्द्र खोलने में देर की गई और खरीद की गति बाद में भी काफी धीमी रही।
