मक्का उत्पादकों की निराशा
22-Nov-2025 10:44 AM
एथनॉल निर्माण उद्योग की जबरदस्त मांग को देखते हुए भारतीय किसानों ने इस वर्ष खरीफ सीजन में मक्का का बिजाई क्षेत्र बढ़ाकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया जिससे इसके शानदार उत्पादन की उम्मीद बढ़ गई। किसानों को भरोसा था कि मक्का की खेती से उसे आकर्षक आमदनी प्राप्त होगी
क्योंकि पशु आहार पॉल्ट्री फीड, स्ट्रार्च तथा एथनॉल उत्पादन में विशाल मात्रा में इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज का उपयोग होगा और इसका खुला बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊंचा रहेगा। यदि कीमतों में गिरावट आई तो सरकार अपनी एजेंसियों के माध्यम से एमएसपी पर मक्का की भारी खरीद सुनिश्चित करेगी।
केन्द्र सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2025-26 सीजन के लिए बढ़ाकर 2400 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जो 2024-25 के लिए नियत एमएसपी 2225 रुपए प्रति क्विंटल से 175 रुपए ज्यादा है।
लेकिन जब खरीफ कालीन मक्का ने घरेलू बाजार में प्रवेश किया तब किसानों को जोरदार झटका लगा क्योंकि इसे ऊंचे दाम तो दूर, एमएसपी पर खरीदने के लिए भी कोई तैयार नहीं था।
मांग कमजोर पड़ने तथा आपूर्ति बढ़ने से मक्का की कीमतों में जोरदार गिरावट आने लगी और देखते ही देखते इसका थोक मंडी भाव लुढ़ककर न्यूनतम समर्थन का आधा रह गया।
इससे खासकर उन छोटे-छोटे एवं सीमान्त किसानों को जबरदस्त आर्थिक नुकसान हो रहा है जिसे अपनी पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसों की जरूरत है और जो लम्बे समय तक इसका स्टॉक अपने पास रखने या रोकने में सक्षम नहीं हैं।
हैरत की बात है कि मक्का उत्पादकों की इस गंभीर परेशानी और कठिनाई से केन्द्र सरकार और प्रमुख उत्पादक राज्यों की सरकार भली-भांति अवगत है लेकिन इसके निस्तारण का कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है।
केवल तेलंगाना सरकार ने इसमें पहल की है और वहां 8 लाख टन का लक्ष्य नियत करते हुए एमएसपी पर मक्का की खरीद शुरू की गई है।
अब कर्नाटक सरकार भी इसमें सक्रियता दिखा रही है। वह एथनॉल निर्माता एवं पॉल्ट्री फीड उद्योग पर दबाव डालना चाहती है कि किसानों से एमएसपी पर मक्का की भरपूर खरीद सुनिश्चित की जाए।
मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों को भी इस दिशा में समुचित प्रयास करने की जरूरत है ताकि मक्का उत्पादकों की मायूसी दूर हो सके।
