मानसून के देर से पहुंचने के बावजूद मध्य प्रदेश में 11 प्रतिशत अधिशेष बारिश

06-Sep-2024 03:23 PM

भोपाल। हालांकि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य प्रदेश में कुछ देर से पहुंचा मगर यह एक बार सक्रिय होने के बाद राज्य के विभिन्न भागों में घूम-घूम कर वर्षा की सौगात बांटता रहा।

अब तक राज्य में सामान्य औसत के मुकाबले 11 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है जबकि वर्षा का दौर अभी जारी है।

जुलाई-अगस्त के दौरान मध्य प्रदेश में इतनी भारी वर्षा हुई कि बारिश की कमी वाले जिलों की संख्या 18 से घटकर सिर्फ एक रह गई। अब केरल रीवा जिला ही ऐसा है जहां सामान्य से कुछ कम बारिश हुई है। 

मौसम विभाग के अनुसार चालू मानसून सीजन के दौरान मध्य प्रदेश में अब तक कुल 896.8 मि०मी० वर्षा हुई है जो सामान्य औसत स्तर 808.2 मि०मी० से 11 प्रतिशत ज्यादा है।

मध्य प्रदेश की राजधानी- भोपाल में 30 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है और वहां कुल वार्षिक कोटा से भी ज्यादा बारिश हो चुकी है। 

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस वर्ष जुलाई-अगस्त की भांति सितम्बर में भी देश के अंदर भारी वर्षा का दौर जारी रहने के आसार हैं और मानसून की कुल वर्षा सामान्य औसत के सापेक्ष 110 प्रतिशत के आसपास हो सकती है।

मौसम विभाग ने अगले सप्ताह मध्यवर्ती भारत में दूर-दूर तक हल्की या सामान्य वर्षा होने का अनुमान लगाया है। पिछले दो-तीन दिनों से कई राज्यों में भारी वर्षा हो रही है।

मौसम विभाग के मुताबिक 5-6 सितम्बर को पूर्वी मध्य प्रदेश में तथा गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ संभाग में भारी वर्षा होने की उम्मीद है।

इसी तरह 6-8 सितम्बर को मध्य महाराष्ट्र, 5-8 सितम्बर के दौरान कोंकण एवं गोवा तथा 10 सितम्बर को विदर्भ क्षेत्र में भारी वर्षा होने की संभावना है। 

यद्यपि आमतौर पर मध्य प्रदेश में जुलाई-अगस्त के मुकाबले सितम्बर में कम वर्षा होती है मगर इस बार परिदृश्य कुछ अलग नजर आ रहा है। राज्य के कुछ जिलों में भारी वर्षा एवं नदियों में उफान के कारण बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है।