मानसून की दशा और दिशा
25-Jul-2026 11:50 AM
जून में अत्यन्त शुष्क एवं निष्क्रिय रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून चालू माह (जुलाई) में बेहतर पोजीशन के साथ सामने आया है जिससे देश के विभिन्न भागों में अच्छी बारिश हो रही है और अगले कुछ दिनों तक इसका सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
इससे खरीफ फसलों की बिजाई बढ़ाने में सहायता मिलेगी और उसकी अच्छी प्रगति भी सुनिश्चित हो सकेगी। चालू माह में मानसून की जोरदार सक्रियता के कारण दीघर्कालीन औसत के सापेक्ष वर्षा की कमी का अंतर घटता जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष 10 प्रतिशत कम वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है और सरकार का मानना है कि वर्षा की कमी 10 प्रतिशत से ज्यादा होने पर खरीफ उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
जुलाई का महीना अच्छी उम्मीद के साथ बीत रहा है और खरीफ फसलों की बिजाई की गति भी तेज हो गई है। वैसे भी जुलाई-अगस्त को सर्वाधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है। इस माह ने अभी तक किसानों और सरकार को निराश नहीं किया है। यदि अगस्त में वर्षा की दशा और दिशा सामान्य रही तो भारतीय मानसून और कृषि क्षेत्र पर अल नीनो मौसम चक्र का ज्यादा गंभीर असर नहीं पड़ेगा। भारत एक विशाल देश है जहां, चावल दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, कपास और गन्ना आदि का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। यदि किसी वर्ष उत्पादन में थोड़ी-बहुत गिरावट आती है तो भारत में उसे बर्दाश्त करने की क्षमता है।
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इस वर्ष मानसूनी वर्षा का वितरण काफी हद तक सामान्य देखा जा रहा है जिससे देश के अत्यन्त सीमित क्षेत्र में सूखे का गंभीर संकट रहने की संभावना है।
दक्षिणी प्रायद्वीप तथा पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत में पहले बारिश की भारी कमी महसूस की जा रही थी मगर हाल के दिनों में वहां भी अच्छी वर्षा हुई है। बेशक अब भी कुछ खेतों को भारी बारिश की आवश्यकता है लेकिन यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि मानसून का सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है। अगस्त में स्थिति सामान्य हो सकती है।
