नेपाल से रिफाइंड खाद्य तेलों के विशाल आयात से भारतीय रिफाइनर्स को भारी नुकसान
25-Jul-2026 01:04 PM
मुम्बई। क्रूड खाद्य तेल एवं रिफाइंड खाद्य तेल के आयात शुल्क में अंतर बढ़ने के बाद इंडोनेशिया एवं मलेशिया जैसे शीर्ष आपूर्तिकर्ता देशों से भारत में आरबीडी पामोलीन के आयात पर काफी हद तक अंकुश लग गया। इससे भारतीय रिफाइनर्स को राहत मिलने की उम्मीद थी लेकिन नेपाल ने बीच में आकर इस उम्मीद पर पानी फेरना शुरू कर दिया।
दरअसल दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) संधि के तहत नेपाल को भारत में उन उत्पादों का शुल्क मुक्त निर्यात करने का अधिकार दिया गया है जिसका उत्पादन वहां होता है। लेकिन नेपाल इस अधिकार का दुरूपयोग करते हुए भारत को रिफाइंड खाद्य तेलों का भारी निर्यात कर रहा है। चूंकि वहां से आयातित खाद्य तेलों पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगता है इसलिए वह भारत में काफी सस्ते दाम पर उपलब्ध रहता है। दूसरी ओर भारतीय रिफाइनर्स को सीमा शुल्क के साथ क्रूड खाद्य तेलों का आयात करके उसकी रिफाइनिंग करनी पड़ती है जिससे रिफाइंड खाद्य तेल का लागत खर्च ऊंचा हो जाता है।
एक खास बात यह है कि नेपाल में तिलहन-तेल का अत्यन्त सीमित उत्पादन होता है जो उसकी घरेलू मांग एवं जरूरत को भी पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है। इसके बावजूद वह भारत को विशाल मात्रा में रिफाइंड खाद्य तेलों का निर्यात करने में फसल हो रहा है। इसका कारण यह है कि नेपाल में विदेशों से क्रूड श्रेणी के पाम तेल, सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी तेल का भारी आयात होता है और स्वदेशी इकाइयों में उसकी प्रोसेसिंग-रिफाइनिंग की जाती है। उसके बाद रिफाइंड खाद्य तेलों को भारत भेज दिया जाता है।
भारतीय वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के सभी प्रमुख संगठन सरकार से नेपाली रिफाइंड खाद्य तेलों के बेतहाशा बढ़ते आयात को नियंत्रित करने की मांग कर रहे हैं लेकिन हकीकत की जानकारी होने के बावजूद सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। दरअसल नेपाल की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वह भारत और चीन के बीच में स्थित है। यदि भारत सरकार ज्यादा सख्ती करेगी तो नेपाल का झुकाव चीन की तरफ बढ़ सकता है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार गत वित्त वर्ष के दौरान नेपाल से भारत को 146 अरब रुपए (नेपाली मुद्रा) मूल्य के 7,04,844 टन रिफाइंड खाद्य तेल का निर्यात किया गया।
