मेप की समाप्ति से बासमती चावल की प्रतिस्पर्धी क्षमता में वृद्धि

26-Sep-2024 03:37 PM

नई दिल्ली । केन्द्र सरकार द्वारा बासमती चावल का लागू न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) को समाप्त किए जाने से इसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ गई है जिससे मध्य पूर्व एशिया, यूरोप एवं अमरीका आदि से नए-नए आर्डर की झड़ी लगने की उम्मीद है।

बासमती चावल के लिए 950 डॉलर प्रति टन का मेप निर्धारित किया गया था इसलिए भारतीय निर्यातक इससे नीचे दाम पर अनुबंध नहीं कर सकते थे। इससे पाकिस्तान को फायदा हो रहा था और वह नीचे मूल्य का ऑफर देकर अपने बासमती चावल का निर्यात बढ़ा रहा था। अब भारतीय निर्यातक भी ऐसा करने में सक्षम हो जाएंगे। 

बासमती चावल के घरेलू उत्पादन में इस बार 10-15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है जबकि निर्यातकों के लिए कीमतों का भी कोई बंधन नहीं रहेगा।

दिलचस्प तथ्य यह है कि वित्त वर्ष 2023-24 में मेप लागू होने के बावजूद भारत से बासमती चावल का निर्यात तेजी से बढ़कर 52 लाख टन से ऊपर पहुंच गया जो एक नया रिकॉर्ड स्तर था।

इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान देश से लगभग 46 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था। समीक्षाधीन अवधि के दौरान इसकी निर्यात आय में भी शानदार बढ़ोत्तरी हुई।

एपीडा के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में यानी अप्रैल-जुलाई 2024 के दौरान भारत से बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 19 लाख टन पर पहुंच गया।

आगामी महीनों में इसका निर्यात प्रदर्शन और भी बेहतर रहने के आसार हैं। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो  वित्त वर्ष 2024-25 की पूरी अवधि में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 2023-24 के रिकॉर्ड स्तर से भी ऊपर पहुंच सकता है।

भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है। न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) बासमती चावल के निर्यात में कुछ बाधा उत्पन्न कर रहा था मगर अब यह समाप्त हो चुका है।

इसके साथ ही भारत अब पाकिस्तान के साथ प्रतिस्पर्धी मूल्य पर अपना उत्पाद विदेशी बाजारों में बेचने में सक्षम हो गया है।

यदि पाकिस्तान 800-850 डॉलर प्रति टन की दर से अपने बासमती चावल का ऑफर देता है तो भारतीय निर्यातक भी ऐसा कर सकते हैं। 

भारत में बासमती धान-चावल का उत्पादन मुख्यत: पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होता है जबकि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली एवं जम्मू कश्मीर इसके अन्य उत्पादक क्षेत्र हैं। अगले महीने से नए बासमती धान की जोरदार आवक शुरू होने की संभावना है।