मार्च में कनाडा से मसूर एवं मटर के तीन शीर्ष आयातक देशों में भारत शामिल नहीं

07-May-2025 10:46 AM

वैंकुवर। भारत की अत्यन्त कमजोर मांग के कारण कनाडा से फरवरी की तुलना में मार्च के दौरान मसूर और मटर के निर्यात में जोरदार गिरावट आ गई।

आमतौर पर भारत इसका सबसे प्रमुख खरीदार देश रहा है मगर मार्च में यह तीन शीर्ष आयातक देशों की सूची से भी बाहर हो गया। दरअसल घरेलू प्रभाग में मटर एवं मसूर की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुधरने तथा कीमत नरम या स्थिर रहने से भारत के आयातकों द्वारा कनाडाई दलहनों की खरीद में बहुत कम दिलचस्पी दिखाई जा रही है। 

सरकारी एजेंसी- स्टैट्स कैन के आंकड़ों से पता चलता है कि कनाडा से फरवरी 2025 में 2,18,978 टन मसूर का निर्यात हुआ था जो मार्च में घटकर 81,226 टन पर अटक गया।

मार्च में कनाडा से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को सर्वाधिक 16,089 टन, अमरीका को 10,634 टन तथा कोलम्बिया को 10,338 टन मसूर का शिपमेंट किया गया।

इस तरह भारत तीन सबसे प्रमुख आयातक देशों की सूची से बाहर हो गया। वैसे चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती आठ महीनों में यानी अगस्त 2024 से मार्च 2025 के दौरान कनाडा से मसूर का कुल निर्यात बढ़कर 15,20,958 टन पर पहुंच गया जो 2023-24 के मार्केटिंग सीजन में इन्हीं महीनों के सकल शिपमेंट 11,93,393 टन से काफी अधिक है। 

जहां तक मटर का सवाल है तो भारत में पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति अभी तक वैध है मगर कनाडा से इसका बहुत कम आयात हो रहा है।

स्टैट्स कैन के आंकड़ों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन के आरंभिक आठ महीनों में कनाडा से मटर का कुल निर्यात घटकर 17,80,055 टन पर अटक गया जो 2023-24 सीजन की समान अवधि के शिपमेंट 21,53,127 टन से काफी कम रहा।

फरवरी 2025 में कनाडा से 1,64,836 टन मटर का निर्यात हुआ था जो मार्च में घटकर 51833 टन पर अटक गया। मार्च में कनाडा से चीन को 19,956 टन, अमरीका को 10,765 टन तथा फिलीपींस को 4928 टन मटर का निर्यात हुआ। ये तीन देश इसके सबसे प्रमुख खरीदार रहे जबकि भारत इस सूची में शामिल नहीं रहा। 

कनाडा से काबुली चना का निर्यात फरवरी के 20,472 टन से बढ़कर मार्च में 23,223 टन पर पहुंच गया। इसका सर्वाधिक निर्यात पाकिस्तान को 7669 टन, अमरीका को 4288 टन तथा इटली को 1683 टन का हुआ।

भारत में कनाडा से काबुली चना का आयात नहीं या नगण्य होता है कनाडा को भारत में पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा समाप्त होने का डर भी सता रहा है।