मसालों का बेहतर निर्यात प्रदर्शन
27-Dec-2025 11:14 AM
क्वालिटी में सुधार आने, कीमत प्रतिस्पर्धी स्तर पर रहने तथा वैश्विक मांग मजबूत होने से भारतीय मसालों का निर्यात प्रदर्शन बेहतर चल रहा है और आगे भी स्थिति अच्छी रहने की उम्मीद है। मसाला बोर्ड के नवीनतम आंकड़ों से ज्ञात होता है कि चालू वित्त वर्ष के शुरूआती सात महीनों में यानी अप्रैल-अक्टूबर- 2025 के दौरान भारत से मसालों का कुल निर्यात बढ़कर 10.70 लाख टन पर पहुंच गया जो पिछले वित्त वर्ष के इन्हीं महीनों के शिपमेंट 9,39,517 टन से करीब 14 प्रतिशत अधिक रहा।
लेकिन विदेशी मुद्रा में इसकी निर्यात आय 1 प्रतिशत फिसलकर 2.57 अरब डॉलर पर अटक गई। इसका कारण रुपए की विनिमय दर में लगातार होने वाला अवमूल्यन माना जा रहा है जिससे डॉलर काफी महंगा हो गया।
निर्यात संवर्धन के लिए भारत को अपने मसालों एवं मसाला उत्पादों का ऑफर मूल्य नीचे रखना पड़। यह प्रक्रिया जारी है। दिलचस्प तथ्य यह है कि समीक्षाधीन अवधि में जीरा का निर्यात 13 प्रतिशत और सौंफ का निर्यात 65 प्रतिशत लुढ़कने के बावजूद मसालों के कुल शिपमेंट में अच्छी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। सेलेरी का निर्यात भी 37 प्रतिशत घट गया। दूसरी ओर कई मसालों के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई जिससे सम्पूर्ण प्रदर्शन संतुलित हो गया।
ध्यान देने की बात है कि भारत दुनिया में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक उपभोक्ता एवं निर्यातक देश है। यहां से संसार के 100 से ज्यादा देशों में 80 से अधिक किस्मों के मसालों एवं मसाला उत्पादों का निर्यात किया जाता जिसमें लालमिर्च, जीरा, धनिया, हल्दी, कालीमिर्च, लहसुन, इलायची एवं जायफल- जावित्री आदि मुख्य रूप से शामिल है। एक महत्वपूर्ण आयातक देश- अमरीका में 50 प्रतिशत का ऊंचा टैरिफ लागू होने के बावजूद भारत से मसालों का निर्यात बढ़ा है।
गत वर्ष की तुलना में अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान भारत से जीरा का निर्यात 1.47 लाख टन से घटकर 1.27 लाख टन, सौंफ का निर्यात 60 हजार टन से लुढ़ककर 21 हजार टन पर अटक गया
जबकि हल्दी का निर्यात 1.09 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 1.11 लाख टन, धनिया का 34 हजार टन से सुधरकर 37 हजार टन, लहसुन का 22 हजार टन बढ़कर 29 हजार टन, मेथी का 25 हजार टन से बढ़कर 28 हजार टन तथा छोटी इलायची का निर्यात 3700 टन से उछलकर 6800 टन पर पहुंच गया।
