मसूर का घरेलू उत्पादन बढ़ाने हेतु सस्ते आयात पर नियंत्रण लगाने का सुझाव
06-Sep-2024 12:38 PM
नई दिल्ली । भारत में जिस तेज गति से सरकारी नीतिगत प्रोत्साहन के सहारे मसूर के आयात में बढ़ोत्तरी हो रही है उससे स्वदेशी उत्पादकों का मनोबल घटता जा रहा है।
विदेशों से विशाल मात्रा में सस्ते माल का आयात जारी रहने से मसूर का घरेलू उत्पादन एक निश्चित सीमा में स्थिर हो गया है जबकि इसकी मांग एवं खपत नियमित रूप से बढ़ती जा रही है।
एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक ने मसूर का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और इसमें आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार को कुछ बेहतर सुझाव दिया है।
इसके तहत मसूर के लिए एक न्यूनतम आयात मूल्य (मिप) का निर्धारण, आयात पर मात्रात्मक नियंत्रण लगाना तथा स्वदेशी उत्पादकों को आकर्षक वापसी सुनिश्चित करना जैसे सुझाव भी शामिल हैं।
बेशक भारत दुनिया में मसूर के तीन शीर्ष उत्पादक देशों में शामिल हैं मगर एक ओर जहां कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इसके सबसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं वहीँ भारत इसका सबसे बड़ा खरीदार (आयातक) बना हुआ है।
भारत में लम्बे समय से मसूर को आयात शुल्क के दायरे से बाहर रखा जा रहा है जिससे व्यापारियों को विदेशों से इसे भारी मात्रा में मंगाने में कोई समस्या नहीं हो रही है। मसूर के आयात पर विशाल धनराशि खर्च होती है और यह धन निर्यातक देशों की तिजोरियां भर रहा है।
मसूर रबी सीजन की एक महत्वपूर्ण दलहन फसल है जिससे बिजाई अक्टूबर-नवम्बर में तथा कटाई-तैयारी मार्च-अप्रैल में शुरू होती है।
व्यापार विश्लेषक के मुताबिक यदि किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ाने का समुचित प्रयास नहीं किया गया तो मसूर के बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की संभावना क्षीण रहेगी।
भारत में मसूर का उत्पादन मुख्यत: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार एवं बंगाल जैसे राज्यों में होता है। आगामी रबी सीजन के लिए एक बार फिर मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।
