मसूर का रकबा औसत क्षेत्रफल से ऊपर पहुंचा

24-Dec-2025 09:28 PM

नई दिल्ली। चना के बाद रबी सीजन की दूसरी सबसे प्रमुख दलहन फसल- मसूर की बिजाई सामान्य गति से हो रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी करके और निश्चित खरीद की गारंटी देकर सरकार किसानों को मसूर का बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है

लेकिन इसमें उसे ज्यादा सफलता मिलते हुए नहीं दिख रही है क्योंकि विदेशों से सस्ती मसूर का आयात नियमित रूप से जारी है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन में 19 दिसम्बर 2025 तक मसूर का उत्पादन क्षेत्र 15.76 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो पिछले वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 15.84 लाख हेक्टेयर से 8 हजार हेक्टेयर कम है।

वर्तमान रबी सीजन के लिए मसूर का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 15.13 लाख हेक्टेयर निर्धारित हुआ है जिसके मुकाबले इसका वास्तविक रकबा 17 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया था जिसकी तुलना में इस बार बिजाई क्षेत्र 1.23 लाख हेक्टेयर पीछे है। 

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार एवं बंगाल जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में मसूर की बिजाई या तो समाप्त हो चुकी है या बिलकुल अंतिम चरण में पहुंच गई है। अन्य छोटे-छोटे उत्पादक राज्यों में सीमित बिजाई हो रही है।

मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती बुंदेलखंड संभाग को मसूर एवं मटर का सबसे प्रमुख उत्पादक इलाका माना जाता है लेकिन इस बार वहां किसानों का रुझान अन्य रबी फसलों की तरफ ज्यादा देखा जा रहा है।

मसूर के आयात पर महज 10 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ है जबकि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं काला सागर क्षेत्र में शानदार उत्पादन होने के कारण इसका वैश्विक भाव नरम पड़ गया है।