मोटे अनाजों की बिजाई धीरे-धीरे पकड़ रही है रफ्तार

25-Nov-2025 10:54 AM

नई दिल्ली। रबी कालीन मोटे अनाजों / श्री अन्न की बिजाई की रफ्तार अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। बेशक किसानों का रुझान अभी गेहूं, दलहन एवं तिलहन फसलों की तरफ ज्यादा है

लेकिन मोटे अनाजों और खासकर ज्वार, मक्का, जौ एवं रागी की बिजाई भी गत वर्ष से आगे चल रही है। बिजाई की प्रक्रिया लम्बे समय तक जारी रहेगी। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर मोटे अनाजों का सकल उत्पादन क्षेत्र 21 नवम्बर 2025 तक बढ़कर 19.70 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 17.25 लाख हेक्टेयर से 2.45 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

इसके तहत ज्वार का रकबा 8.45 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 9.00 लाख हेक्टेयर, रागी का क्षेत्रफल 40 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 50 हजार हेक्टेयर, मक्का का उत्पादन क्षेत्र 5.40 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 6.60 लाख हेक्टेयर तथा जौ का बिजाई क्षेत्र 3 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.50 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। स्मॉल मिलेट्स का रकबा भी बढ़ गया है। रबी सीजन में बाजरा की खेती बहुत कम होती है। 

हालांकि मक्का का थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है लेकिन फिर भी इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण कम नहीं हुआ है।

रबी सीजन के लिए मक्का का सामान्य औसत क्षेत्रफल 23.61 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि अभी इसके 25 प्रतिशत से अधिक भाग में बिजाई पूरी हो चुकी है।

रबी कालीन मक्का के सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य- बिहार में बिजाई की गति बाद में जोर पकड़ती है क्योंकि वहां खरीफ फसलों की कटाई देर से होती है। 

राजस्थान में जौ का रकबा बढ़ रहा है क्योंकि वहां किसानों को इससे अच्छी आमदनी प्राप्त होती रही है। इसी तरह महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान एवं कर्नाटक  सहित कुछ अन्य राज्यों में ज्वार की खेती में किसान अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आगामी समय में श्री अन्न / मोटे अनाजों के बिजाई क्षेत्र में अच्छा सुधार देखने को मिल सकता है।