मध्य जुलाई तक सोयाबीन का क्षेत्रफल 119.43 लाख हेक्टेयर पर पहुंचने का सोपा का अनुमान

17-Jul-2025 08:00 PM

इंदौर। खरीफ सीजन की प्रमुख तिलहन फसल- सोयाबीन की जोरदार बिजाई देश के सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में हो रही है जिसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात एवं अन्य छोटे उत्पादक प्रान्त भी शामिल है।

सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र के सरकारी आंकड़े एवं सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के आंकड़े में लगभग 10 लाख हेक्टेयर का भारी अंतर देखा जा रहा है जो हैरान करने वाला है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 14 जुलाई तक राष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन का कुल उत्पादन क्षेत्र 109.56 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। इसके तहत इसका क्षेत्रफल मध्य प्रदेश में 47.96 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 44.68 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 9.29 लाख हेक्टेयर तथा  गुजरात में 1.90 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया।

इसके अलावा तेलंगाना में 9 जुलाई तक 1.23 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक में 11 जुलाई तक  4.02 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बिजाई हुई। सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र छत्तीसगढ़ में 14 हजार हेक्टेयर एवं देश के अन्य राज्यों में 35 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया। इस महत्वपूर्ण तिलहन की बिजाई अभी जारी है। 

दूसरी ओर सोपा का आंकड़ा बताता है कि इसी अवधि के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 119.43 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसके तहत इसका क्षेत्रफल मध्य प्रदेश में 51.90 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 48.20 लाख हेक्टेयर, राजस्थान में 10.80 लाख हेक्टेयर तथा  गुजरात में 2.56 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा।

इसके अलावा सोयाबीन का रकबा कर्नाटक में 11 जुलाई तक 4.02 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 9 जुलाई तक 1.47 लाख हेक्टेयर रहा जबकि छत्तीसगढ़ में 14 हजार हेक्टेयर और अन्य प्रांतों में 35 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया। 

कृषि मंत्रालय एवं सोपा के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण करने से पता चलता है कि तीनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान में बिजाई क्षेत्र का सोपा का आंकड़ा सरकारी आंकड़े से काफी ज्यादा है।

गुजरात में भी सोपा का आंकड़ा बड़ा है जबकि कर्नाटक, छत्तीसगढ़ एवं अन्य प्रांतों के आंकड़ों में कोई बदलाव नहीं है। तेलंगाना में कृषि मंत्रालय के मुकाबले सोपा के सोयाबीन बिजाई क्षेत्र का आंकड़ा करीब 24 हजार हेक्टेयर बड़ा है।