म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों से दलहन आयात के एमओयू की अवधि समाप्त
01-Apr-2026 01:50 PM
नई दिल्ली। पूर्वोत्तर पड़ोसी देश- म्यांमार से तुवर एवं उड़द तथा दो अफ्रीकी देश- मोजाम्बिक एवं मलावी से तुवर की एक निश्चित मात्रा के सालाना आयात के लिए भारत सरकार ने जो पंचवर्षीय आपसी सहमति का समझौता (एमओयू) किया था उसकी समय सीमा 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई।
सरकार ने उम्मीद के अनुरूप इसे आगे बढ़ाने का प्रयास नहीं किया क्योंकि बदले हालात में इस समझौते की कोई जरूरत या प्रासंगिकता महसूस नहीं की जा रही है।
सरकार ने अलग-अलग अधिसूचना जारी करके तुवर एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अवधि को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है और पीली मटर के आयात पर 30 प्रतिशत के सीमा शुल्क को बरकरार रखने का निर्णय लिया है।
दलहनों के आयात पर कोटा प्रणाली बहुत पहले समाप्त हो चुकी है और अब खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के अंतर्गत इसका आयात हो रहा है।
इस पर कोई मात्रात्मक नियंत्रण लागू नहीं है। आयातक अपनी मर्जी मर्जी से और जरूरत के अनुसार किसी भी देश से दलहनों का आयात करने के लिए स्वतंत्र हैं और उन्हें किसी बाधा का सामना नहीं करना पड़ता है।
भारत में उड़द का आयात मुख्यतः म्यांमार एवं ब्राजील से होता है जबकि अरहर (तुवर) का आयात म्यांमार के साथ-साथ मलावी, मोजाम्बिक, तंजानिया एवं सूडान जैसे अफ्रीकी देशों से किया जाता है।
उद्योग-व्यापार क्षेत्र के समीक्षकों का कहना है कि खुले आयात की व्यवस्था में एमओयू की भूमिका नगण्य होती है। भारत के लिए इन दोनों दलहनों की आपूर्ति के स्रोत सीमित हैं इसलिए निर्यातक देशों पर भी एमओयू की समाप्ति का कोई असर नहीं पड़ेगा।
