नकली या घटिया बीज के खिलाफ सख्त कानून का प्रारूप तैयार

18-Nov-2025 01:52 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने बीज विधेयक 2025 का प्रारूप जारी कर दिया है जिसमें भारतीय बीज क्षेत्र के लिए अत्यन्त सख्त नियम-प्रावधान का प्रस्ताव रखा गया है।

इसके तहत बीज की विभिन्न किस्मों के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन सभी उत्पादकों के लिए लाइसेंस प्राप्त करने और एक श्रेणीबद्ध जुर्माने का सिस्टम शामिल है।

इस विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद सरकार को शिपमेंट- प्रावधानों का बार-बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 30 लाख रुपए तक का अर्थ दंड लगाने और तीन साल तक के लिए कारावास की सजा दिलवाने का अधिकार मिल जाएगा। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा गत 12 नवम्बर 2025 को यह ड्राफ्ट बिल जारी किया गया जो सीड्स एक्ट, 1966 को और साथ ही साथ सीड्स (कंट्रोल) आर्डर, 1983 को विस्थापित करेगा।

इस नए विधेयक का उद्देश्य बिक्री और आयात के लिए बीजों की गुणवत्ता को विनयमित करना, प्रमाणित किस्मों के बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा बीजों के उत्पादन एवं कारोबार को संचालित करने हेतु वैधानिक फ्रेम वर्क को क्रियान्वित करना है।

इस प्रस्तावित नए कानून में कहा गया है कि जब तक इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत न हो जाए तब तक किसी किस्म के बीज का विपणन और वितरण नहीं किया जा सकता है।

लेकिन किसानों द्वारा अपने उपयोग के लिए उत्पादित बीजों तथा अन्य उत्पादों द्वारा सिर्फ और सिर्फ निर्यात उद्देश्य के लिए उत्पादित बीजों को इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है।

इसका मतलब यह है कि केवल घरेलू प्रभाग में व्यावसायिक कारोबार के लिए उत्पादित बीज ही इसमें शामिल होंगे। इस विधेयक में विभिन्न किस्मों एवं श्रेणियों के बीजों के लिए एक नेशनल रजिस्टर का प्रावधान भी रखा गया है। इसका संचालन (निगरानी) केन्द्र द्वारा नियुक्त एक रजिस्ट्रार द्वारा किया जाएगा। 

देश के अनेक राज्यों में घटिया अथवा नकली बीजों के कारोबार की शिकायत लगातार मिलती रही है जिससे न केवल उत्पादन पर असर पड़ता है बल्कि किसानों की आमदनी भी प्रभावित होती है।

सरकार इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाने जा रही है। घटिया बीज के उत्पादकों एवं विक्रेताओं पर शिकंजा कसने में नया कानून काफी कारगर साबित हो सकता है।