नारियल एवं कोपरा के दाम में अनेक कारणों से हो रही बढ़ोत्तरी
07-Jul-2025 01:45 PM
कोच्चि। पिछले कुछ महीनों से नारियल, कोपरा एवं नारियल तेल के दाम में जबरदस्त बढ़ोत्तरी का माहौल बना हुआ है जिसके लिए अनेक घरेलू कारणों के साथ-साथ वैश्विक कारण भी जिम्मेवार है। दरअसल वर्ष 2019-20 में कोरोना महामारी आरंभ होने के बाद से ही नारियल एवं इसके उत्पादों से बाजार में हलचल बरकरार है।
नारियल विकास बोर्ड (सीडीबी) के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान नारियल का उत्पादन एवं परिवहन प्रभावित हुआ था और जब कीमतें तेज हो गईं तब सबने नारियल तेल के निर्माण के लिए नारियल को कोपरा में बदलने का प्रयास आरंभ कर दिया।
लेकिन इससे ज्यादा सहायता नहीं मिली और नारियल का भाव तेज होने के बजाए मार्च 2022 में घटकर काफी नीचे आ गया। कीमतों में नरमी का रुख अगस्त 2024 तक बरकरार रहा।
इसके फलस्वरूप नारियल का उत्पादन केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में भी काफी घट गया इसमें इंडोनेशिया फिलीपींस एवं श्रीलंका जैसे अग्रणी उत्पादक देश भी शामिल थे।
जलवायु परिवर्तन, सूखा एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं की वजह से भी नारियल का उत्पादन प्रभावित हुआ। तापमान में भारी उतार-चढ़ाव का भी बागानों पर असर पड़ा।
दरअसल कीमतों में जोरदार गिरावट आने के कारण उत्पादकों की आमदनी घट जाने से नारियल के बागानों की देखभाल पर कम ध्यान दिया गया। उसमें उर्वरकों का उपयोग घटा दिया गया।
कोरोना के बाद स्वास्थ्य के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी और इसके फलस्वरूप खासकर उत्तरी भारत में अपरिपक्व नारियल (टेंडर कोकोनट) की मांग तेजी से बढ़ गई।
नारियल पानी का उपयोग बढ़ गया। उत्पादकों ने कर्नाटक एवं तमिलनाडु के बागानों से ट्रकों में लादकर कच्चे नारियल को बड़े पैमाने पर उत्तरी भारत में भेजना शुरू कर दिया।
चूंकि उत्पादकों ने नारियल को पूरी तरह परिपक्व होने (पकने) का इंतजार नहीं किया और कच्चे नारियल को ही बड़े पैमाने पर तोड़ना शुरू कर दिया क्योंकि इससे उसे ज्यादा आमदनी प्राप्त हो रही थी
इसलिए मैच्योर नारियल (जो कोपरा बनाने में काम आता है) का उत्पादन घटने लगा। दूसरी ओर डेस्सीलेटेड कोकोनट पाऊडर, कोकोनट मिल्क तथा वर्जिन नारियल तेल के निर्माण एवं कारोबार में संलग्न उद्योग में नारियल की मांग तेजी से बढ़ती रही क्योंकि विदेशों से इसका जोरदार निर्यात हो रहा था। इससे नारियल एवं कोपरा का भाव उछलने लगा।
सितम्बर 2024 से ही नारियल एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों की कीमतों में तेजी- मजबूती का सिलसिला आरंभ हो गया था जो कमोबेश जून 2025 तक बरकरार रहा।
अब तमिलनाडु में नारियल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती जा रही है और अगले दो से तीन माह के अंदर कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद की जा रही है।
