रूस से अनाज एवं तिलहनों का जोरदार निर्यात

25-Nov-2025 01:53 PM

मास्को। काला सागर क्षेत्र में सबसे प्रमुख कृषि उत्पादक देश- रूस में अनाजों एवं तिलहनों का निर्यात अत्यन्त तेजी से हो रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि वहां किसानों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है जिससे उन्हें कम दाम पर भी अपने उत्पादों की बिक्री तेजी में करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। कई फसल की आवक जुलाई में ही शुरू हो गई थी। 

एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक फर्म के अनुसार दिसम्बर माह के दौरान रूस से अनाजी जिंसों का कुल निर्यात (बिक्री) बढ़कर 110 लाख टन पर पहुंच गया जो अब तक किसी एक माह की सबसे बड़ी मात्रा है।

इसी तरह तिलहनों की कुल बिक्री भी 17 लाख टन दर्ज की गई जो सितम्बर माह के लिए के एक नया रिकॉर्ड और वर्ष 2020 के सर्वोच्च मासिक निर्यात के बराबर है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में रूस में सूरजमुखी बीज के निर्यात पर कोई टैक्स लागू नहीं था मगर अब सीमा शुल्क प्रभावी हो गया है।

अक्टूबर 2025 में भी अनाजों की कुल बिक्री 93 लाख टन के उच्च स्तर पर रही जो वर्ष 2022 के बाद की सबसे बड़ी मासिक बिक्री थी।

रिकॉर्ड उत्पादन के कारण अक्टूबर 2022 में वहां 99 लाख टन अनाज की जोरदार बिक्री हुई थी। जहां तक तिलहनों की बिक्री का सवाल है तो अक्टूबर 2025 में इसकी मात्रा उछलकर 30 लाख टन पर पहुंच गई जो दिसम्बर 2023 के सर्वोच्च स्तर 31 लाख टन के बाद अब तक का दूसरा सबसे मासिक ऊंचा स्तर है। 

यूक्रेन के साथ भयंकर युद्ध में उलझे रूस के किसानों की वित्तीय स्थिति खराब होती जा रही है और उसे अपने कर्ज का भुगतान करने के लिए उत्पादों की भारी बिक्री करनी पड़ रही है।

व्यापारी और निर्यातक इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं मगर किसानों की आय में कमी आ रही है। किसानों को शीतकालीन फसलों की बिजाई के लिए भी धन की भारी जरूरत है।

उल्लेखनीय है कि जनवरी से अगस्त 2025 के आठ महीनों में जब रूस में अनाज एवं तिलहन पर टैक्स लागू नहीं था तब इसकी बिक्री से किसानों को 67 अरब रूबल की आमदनी हुई थी जो गत वर्ष की समान अवधि की आय से 25 प्रतिशत तक रही।

रूस दुनिया में गेहूं का सबसे बड़ा निर्यातक देश है जबकि वहां से मक्का, जौ, सूरजमुखी, मटर एवं मसूर सहित कई अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।