पंजाब में फसल विविधिकरण के लिए दलहन मिशन होगा कारगर
04-Feb-2025 11:59 AM
चंडीगढ़ । केन्द्रीय वित्त मंत्री ने आम बजट में छह वर्षीय दलहन मिशन के लिए 1000 करोड़ रुपए का आवंटन किया है जिसका उद्देश्य खासकर तुवर, उड़द एवं मसूर पर विशेष ध्यान देते हुए दलहनों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।
दो केन्द्रीय एजेंसियों- नैफेड तथा एनसीसीएफ को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अगले चार साल तक दलहन खरीदने का दायित्व सौंपा गया है।
यह दलहन मिशन खासकर पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में फसल विविधिकरण स्कीम को सफल बनाने में कारगर साबित हो सकता है जहां फिलहाल धान और गेहूं की खेती को प्राथमिकता दी जाती रही है।
इससे वहां कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। जल स्तर घटता जा रहा है, मिटटी की सेहत बिगड़ रही है, पर्यावरण का नुकसान हो रहा है और दलहन-तिलहन की खेती पिछड़ रही है।
यदि धान एवं गेहूं के परम्परागत उत्पादक क्षेत्रों में कुछ कटौती करके उसमें दलहनों की खेती की जाए तो किसानों को बेहतर आमदनी प्राप्त हो सकती है और दलहनों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिल सकती है।
पंजाब में खरीफ और रबी सीजन के दौरान लगभग 90 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि में धान तथा गेहूं की खेती होती है। इसकी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर निश्चित रूप से होती है इलसिए इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बरकरार रहता है।
दलहन-तिलहन के मामले में ऐसा नहीं है। इसकी कीमतें घटती-बढ़ती रहती हैं और इसकी सरकारी खरीद का भी कोई स्थायी नियम नहीं है।
अब केन्द्र सरकार ने चार साल तक दलहनों की खरीद की गारंटी दी है जिससे किसानों का ध्यान इसकी तरफ आकर्षित हो सकता है।
दलहनों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी अच्छी बढ़ोत्तरी की जाती है। पंजाब में औसतन 32 लाख हेक्टेयर में धान तथा 35 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। इसमें यदि 2-4 लाख हेक्टेयर की कटौती हो जाए तो वहां दलहनों का अच्छा उत्पादन हो सकता है।
हरियाणा में भी इसकी गुंजाईश है। देश में खाद्यान्न का पर्याप्त उत्पादन हो रहा है लेकिन दलहन-तिलहन की पैदावार घरेलू जरूरत से काफी कम होती है।
