पंजाब में धान की मिलिंग नीति में बदलाव होने से डीलर्स को राहत मिलने की उम्मीद

09-Oct-2024 04:23 PM

चंडीगढ़ । पंजाब सरकार ने 2024-25 के वर्तमान खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान अधीनस्थ एजेंसियों द्वारा किसानों से खरीदें जाने वाले धान की कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को स्टॉक आवंटित करने तथा उसकी मिलिंग से निर्मित होने वाले चावल (सीएमआर) को केन्द्रीय पूल में सही समय पर जमा करने के लिए नई कस्टम मिलिंग नीति को मंजूरी प्रदान कर दी है।

पिछले दिन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया। कस्टम मिलिंग नीति में कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं जिससे राइस मिलर्स / शेलर्स को राहत मिलने की उम्मीद है।

पंजाब में केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के साथ-साथ पनग्रेन, मार्कफेड, पनसप एवं राज्य भंडारण निगम जैसी प्रांतीय एजेंसियों द्वारा भी धान की भारी खरीद की जाती है। 1 अक्टूबर से पंजाब में खरीफ कालीन धान की सरकारी खरीद का सीजन औपचारिक तौर पर शुरू हो चुका है। 

कस्टम मिलिंग नीति में हुए बदलाव के बाद अब शेलर मालिक अपने प्लांट के कागजात खरीद एजेंसी के नाम पर गिरवी रख सकते हैं। राइस मिलर्स को सीधे मंडियों से ऑन लाइन जोड़ा जाएगा और धान का वितरण भी ऑन लाइन पोर्टल से किया जाएगा।

धान का कोटा पाने के लिए शेलर मालिकों की बैंक सिक्योरिटी घटाकर अब 5 लाख रुपए निर्धारित की गई है। 

उल्लेखनीय है कि पंजाब में प्रत्येक वर्ष धान की मिलिंग नीति को संशोधित या अघतन (अपडेट) किया जाता है। राज्य में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की खरीद 1 अक्टूबर से आरंभ होकर 30 नवम्बर तक जारी रहती है।

पहले शेलर मालिकों को सरकार से प्राप्त धान की कीमत की समतुल्य राशि सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा करवाई पड़ती थी मगर अब केवल 5 लाख रुपए ही जमा करवाना आवश्यक होगा।

इसके अलवा शेलर मालिकों को स्टॉक के अनुरूप बैंक गारंटी देनी पड़ती थी मगर अब दूसरे विकल्प के रूप में वे अपनी प्रॉपर्टी के कागजात एजेंसियों के पास गिरवी (लियन) रख सकते हैं।

कस्टम मिलिंग की फीस को 175 रुपये प्रति टन से 10 रुपए घटाकर 165 रुपए प्रति निर्धारित किया गया है। राइस मिलर्स को धान की सम्पूर्ण मात्रा की मिलिंग करके 31 मार्च 2025 तक चावल का स्टॉक सरकारी गोदामों में जमा करवाना आवश्यक होगा।