पाम तेल का बाजार ऊपर उठने के लिए संघर्षरत
25-Nov-2025 11:53 AM
कुआलालम्पुर। प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में पाम तेल का भाव ऊपर उठने के लिए संघर्षरत है मगर उसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है। सबसे प्रमुख आयातक देश भारत में अमरीकी डॉलर के मुकाबले रुपया की विनिमय दर में कमजोरी आने से हालात और भी खराब हो रहे हैं।
यदि यही स्थिति बरकरार रही तो क्रूड पाम तेल का भाव घटकर मई अनुबंध के निकट यानी 3700 रिंगिट प्रति टन के आसपास आ सकता है। वर्तमान समय में बाजार पर कमजोर मांग के साथ आपूर्ति का भारी दबाव देखा जा रहा है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार इंडोनेशिया में बायोडीजल के निर्यात में 50 प्रतिशत पाम तेल की अनिवार्य उपयोग (बी 50 प्रोग्राम) अगले साल की दूसरी छमाही में आरंभ होने की संभावना है और तब तक मलेशिया एवं इंडोनेशिया में पाम तेल की कीमतों पर विशाल अधिशेष स्टॉक का दबाव बना रह सकता है।
मलेशियाई पाम तेल का निर्यात पिछले माह की तुलना में करीब 20 प्रतिशत सीधे चल रहा है। जिससे कीमतों में तेजी की संभावना नहीं बन रही है।
भारत में पाम तेल की मांग कमजोर पड़ गई है। हालांकि इसका दीर्घ कालीन परिदृश्य तेजी का संकेत देता है लेकिन निकट भविष्य में बाजार के लिए कुछ अवरोध दिखाई पड़ रहे हैं।
पाम तेल के वर्तमान भाव काफी नीचे प्रतीत होता है इसलिए जब मांग मजबूत होगी तब कीमतों में सुधार का सिलसिला आरंभ हो सकता है।
यदि सोयाबीन तेल का मूल्य ऊपर चढ़ा तो पाम तेल बाजार को कुछ समर्थन मिल सकता है और यह ऊपर में 4250 रिंगिट प्रति टन पर पहुंच सकता है। चीन ने अमरीका से सोयाबीन खरीदना आरंभ कर दिया है।
भारत के लिए क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का निर्यात ऑफर मूल्य फिलहाल 1100 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहा है जिसमें शिपमेंट चार्ज भी शामिल है।
लेकिन इस मूल्य स्तर पर खरीदारों का अभाव है जिससे कारोबार सीमित हो रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया का मूल्य कमजोर पड़ गया है।
