पाम तेल पर आयात शुल्क बढ़ने से खाद्य तेलों एवं साबुन आदि के महंगा होने की संभावना
18-Sep-2024 06:08 PM
मुम्बई । केन्द्र सरकार ने सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल की भांति क्रूड पाम तेल पर भी आयात शुल्क में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी है जिससे इसकी दर 5.5 प्रतिशत से बढ़कर 27.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
इसके फलस्वरूप न केवल पाम तेल तथा अन्य खाद्य तेलों के दाम में वृद्धि हो सकती है बल्कि ऐसा साबुन एवं श्रृंगार प्रसाधन भी महंगा हो सकता है जिसके निर्माण में पाम तेल का उपयोग किया जाता है।
क्रूड खाद्य तेलों के साथ-साथ रिफाइंड खाद्य तेलों पर भी आयात शुल्क में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार साबुन, पर्सनल फेयर प्रोडक्ट्स तथा स्नैक्स आदि के निर्माण एवं कारोबार में संलग्न बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने ब्रांडेड उत्पादों के दाम में 1.6 से 2.5 प्रतिशत तक का इजाफा कर सकती हैं तभी उसका लाभांश सुरक्षित रहेगा अन्यथा उसके मार्जिन में कमी आ जाएगी।
खाद्य तेलों के आयात पर अंकुश लगाने तथा स्वदेशी तिलहन उत्पादकों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने पिछले सप्ताह क्रूड एवं रिफाइंड श्रेणी के खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 20-20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने की घोषणा की थी। रिफाइंड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़कर अब 37.5 प्रतिशत हो गया है।
इस शुल्क वृद्धि का सीधा असर साबुन एवं पर्सनल फेयर प्रोडक्ट्स के निर्माताओं पर पड़ेगा जो क्रूड पाम तेल के एक डेरिवेटिव का इस्तेमाल करते हैं।
इसके अलावा रिफाइंड पाम तेल तथा विशिष्ट श्रेणी की वसाओं का उपयोग करके बिस्कुट एवं स्नैक्स आदि का निर्माण करने वाली कंपनियां भी इस शुल्क वृद्धि से प्रभावित होंगी और उसे भी अपने उत्पादों का दाम बढ़ाने के लिए विवश हुआ पड़ सकता है।
अनेक एफएमसीजी कंपनियों के लिए पाम तेल एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है जिसका साबुन एवं श्रृंगार प्रसाधनों के निर्माण में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
हालांकि सरकार ने प्रोसेसर्स से खाद्य तेलों के उच्चतम खुदरा मूल्य में तत्काल कोई बढ़ोत्तरी नहीं करने के लिए कहा है लेकिन इसका कितना पालन होता है यह देखने वाली बात होगी। सरसों तेल का दाम पहले ही काफी बढ़ चुका है।
