प्राकृतिक आपदाओं का गेहूं की क्वालिटी एवं पैदावार पर असर
27-Apr-2026 11:38 AM
नई दिल्ली। हालांकि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने गेहूं का घरेलू उत्पादन 2024-25 सीजन के 1179.40 लाख टन से बढ़कर 2025-26 के वर्तमान रबी सीजन में 1202.10 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है मगर रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा करवाए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है
कि 2024-25 के रबी सीजन में 1096.30 लाख टन गेहूं का घरेलू उत्पादन हुआ था जो 2025-26 के मौजूदा सीजन में कुछ बढ़कर 1106.50 लाख टन पर पहुंच सकता है।
नई दिल्ली में पिछले दिन आयोजित एक कार्यक्रम में "वार्षिक गेहूं सर्वेक्षण रिपोर्ट 2026" को जारी करते हुए केन्द्रीय खाद्य संजीव चोपड़ा ने कहा कि राज्य सरकारों के अनुरोध पर गेहूं खरीद का कोटा (लक्ष्य) 303 लाख टन से बढ़ाकर 345 लाख टन नियत किया गया है।
इसके तहत खरीद का लक्ष्य मध्य प्रदेश में 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 10 लाख टन से बढ़ाकर 25 लाख टन, राजस्थान में 21 लाख टन से बढ़ाकर 23.50 लाख टन एवं बिहार में 18 हजार टन से बढ़ाकर 1.80 लाख टन निर्धारित किया गया है।
खाद्य सचिव ने फ्लोर मिलर्स को गेहूं की जरूरत को पूरा करने के लिए सरकारी स्टॉक पर आश्रित रहने के बजाए आत्मनिर्भर बनने और सीधे मंडियों में किसानों से आवश्यक मात्रा में इसकी खरीद करने का सुझाव दिया।
वैसे उन्होने कहा कि जुलाई से नया बिक्री सीजन आरंभ होने से पूर्व खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) से सम्बन्धित नीति जारी की जा सकती है।
फ्लोर मिलर्स के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से गेहूं पर भंडारण सीमा का आदेश लागू रहने के बावजूद अनेक व्यापारियों / स्टॉकिस्टों ने आगे दाम बढ़ने की उम्मीद से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊंचे भाव पर गेहूं की खरीद की थी
लेकिन कीमतों में तेजी नहीं आने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हो गया। इसके फलस्वरूप चालू वर्ष के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने की रिपोर्ट आने के बावजूद सभी व्यापारी / स्टॉकिस्ट गेहूं की खरीद में सावधानी बरत रहे हैं।
