प्रोत्साहन राशि के अभाव में यूपी में हजारों चावल मिलों में लगे ताले
25-Sep-2024 01:29 PM
लखनऊ । धान-चावल के एक अग्रणी उत्पादक राज्य- उत्तर प्रदेश में सरकार की ओर से पर्याप्त सहयोग- समर्थन नहीं मिलने तथा कारोबार में भारी घाटा होने के कारण अब तक 11 हजार से अधिक राइस मिलें बंद हो चुकी है और जो इकाइयां अभी क्रियाशील हैं उसमें भी अधिकांश की वित्तीय हालत खराब है।
राइस मिलर्स ने राज्य सरकार से चावल उद्योग की समस्याओं एवं चुनौतियों को दूर करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है ताकि आगे किसी मिल ने बंद होने की नौबत न आ सके।
पिछले दिन लखनऊ में राइस मिलर्स एसोसिएशन की वार्षिक आम बैठक में अध्यक्ष ने यूपी के उप मुख्यमंत्री की उपस्थिति में यह मामला उठाते हुए कहा कि वर्ष 2011-12 में उत्तर प्रदेश में चावल मिलों की कुल संख्या करीब 14 हजार थी जो अब घटकर महज 2500 रह गई है।
इसका मतलब यह हुआ कि पिछले 12 वर्षों के दौरान राज्य में 11,500 चावल मिलों में ताले लग गए। संक्षेप में कहा जाए तो इस अवधि के दौरान प्रति वर्ष लगभग 1000 चावल मिलें बंद होती रही मगर सरकार ने इसे रोकने का गंभीर प्रयास नहीं किया। इससे स्थिति लगातार खराब होती गई।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि पिछले चार दशकों से केन्द्र सरकार द्वारा धान की मिलिंग (कुटाई) के एवज में मात्र 10 रुपए प्रति क्विंटल की दर से चावल मिलों को भुगतान किया जा रहा है जो अत्यन्त निम्न स्तर का है। इसमें बढ़ोत्तरी किए जाने की सख्त जरूरत है।
एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश में खरीफ कालीन धान की नई फसल की कटाई-तैयारी शुरू होने से पूर्व चावल की रिकवरी प्रतिशत का मामला भी उठाया है।
उसका कहना है कि सरकार ने धान से चावल की औसत रिकवरी दर 67 प्रतिशत नियत कर रखी है जबकि वास्तविक रिकवरी इससे कम होती है। मिलर्स को कोई प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती है और वे घाटा को लम्बे समय तक सहन नहीं कर सकते हैं।
