परिवहन एवं भंडारण में सरकारी खाद्यान्न का भारी नुकसान

26-Nov-2025 11:32 AM

नई दिल्ली। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीनों में यानी अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान परिवहन के क्रम में 40 हजार टन तथा भंडारण के क्रम में करीब 13 हजार टन सरकारी खाद्यान्न बर्बाद हो गया। इससे भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को काफी वित्तीय नुकसान हुआ। 

इस सरकारी एजेंसी के अनुसार अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान अधिशेष  उत्पादन वाले राज्यों से अभावग्रस्त प्रांतों में कुल 241.60 लाख टन खाद्यान्न के स्टॉक का परिवहन हुआ जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए भेजा गया अनाज भी शामिल था।

इसमें से 40,000 टन या 0.17 प्रतिशत खाद्यान्न बर्बाद हो गया। इस नुकसान के अनेक कारण बताए जा रहे हैं। एक जगह से दूसरी जगह तक अनाज को भेजने में कई बार इसका संचालन ठीक से नहीं हो पाता है, स्पिलेज की समस्या रहती है, रास्ते में अनाज चोरी भी हो जाता है और रेलवे का बुनियादी ढांचा भी स्तरीय नहीं है।

इसके अलावा कई बार तापमान में आने वाले उतार-चढ़ाव तथा नमी के अंश में कमी-वृद्धि के कारण खाद्यान्न का स्टॉक इतना खराब हो जाता है कि उसे फेंकना पड़ता है क्योंकि वह मनुष्य तो क्या, पशुओं के खाने के लायक भी नहीं रहता है। 

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान परिवहन के क्रम में 2.36 अरब रुपए मूल्य के 73 हजार टन खाद्यान्न का नुकसान हुआ था जिसके मुकाबले 2025-26 में कम क्षति हुई है। पिछले कुछ दशकों के दौरान अनाज के नुकसान में काफी कमी आई है।

कुल खाद्यान्न परिवहन के सापेक्ष यह नुकसान 1990 में 1.7 प्रतिशत  था जो 2015 तक आते-आते घटकर 0.3 प्रतिशत रह गया और अब 0.2 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है।

इसके अलावा भंडारण एवं रख रखाव के क्रम में करीब 13 हजार टन अनाज बर्बाद हुआ है। गत वर्ष सरकारी गोदामों में 448.70 लाख टन खाद्यान्न के कुल स्टॉक में से 0.3 प्रतिशत भाग विभिन्न कारणों से नष्ट हो गया था।