परिवहन के दौरान 23 हजार टन सरकारी खाद्यान्न का नुकसान

17-Jul-2025 04:17 PM

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यानी अप्रैल- जून 2025 के दौरान केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को परिवहन के क्रम में करीब 23 हजार टन खाद्यान्न का नुकसान झेलना पड़ा जिसका मूल्य 75.90 करोड़ रुपए आंका गया।

इस तिमाही के दौरान खाद्य निगम के गोदामों से समूचे देश में करीब 128 लाख टन खाद्यान्न का परिवहन हुआ जो मुख्यतः अधिशेष स्टॉक वाले राज्यों से अभावग्रस्त प्रांतों को भेजा गया। इसमें से 0.18 प्रतिशत खाद्यान्न खतिग्रस्त हो गया। 

एफसीआई के अनुसार परिवहन (ट्रांजिट) के दौरान अनेक कारणों से खाद्यान्न का नुकसान हो जाता है जिसमें बार-बार माल को चढ़ाना-उतारना, बोरियों से निकासी, रास्ते में चोरी, रेलवे का कमजोर बुनियादी ढांचा तथा तापमान एवं नमी के स्तर में उतार-चढ़ाव आदि शामिल है।

ज्ञात हो कि वित्त वर्ष 2024-25 की इस अवधि के दौरान खाद्य निगम को परिवहन के क्रम में 2.36 अरब रुपए मूल्य के 73 हजार टन या 0.17 प्रतिशत खाद्यान्न का नुकसान उठाना पड़ा था। 

चालू वर्ष के दौरान खाद्य निगम द्वारा करीब 301 लाख टन गेहूं खरीदा गया जबकि चावल की खरीद खरीफ एवं रबी मार्केटिंग सीजन के शुरूआती नौ महीनों में बढ़कर 531 लाख टन पर पहुंच गई। 

दिलचस्प तथ्य यह है कि एक तरफ परिवहन के दौरान 23 हजार टन खाद्यान्न का नुकसान हुआ तो दूसरी ओर भंडारण के क्रम में उसे 66 हजार टन का फायदा भी हो गया जो 2024-25 में कुल भंडारित मात्रा 805 लाख टन का 0.08 प्रतिशत रहा। समझा जाता है कि भंडारण के बाद गेहूं में नमी का अंश बढ़ने लगता है जिससे उसका वजन बढ़ जाता है लेकिन चावल में नमी का अंश घट जाता है। 

एफसीआई को अप्रैल-जून में भंडारण के क्रम में भी 20 हजार टन खाद्यान्न का नुकसान हो गया जिसका मूल्य 84.42 करोड़ रुपए आंका गया और जो गोदमों में इस अवधि के दौरान कुल भंडारित मात्रा 222 लाख टन का 0.09 प्रतिशत रहा।