रबी फसलों का रकबा गत वर्ष से 9.90 लाख हेक्टेयर आगे
05-Nov-2025 12:57 PM
नई दिल्ली। खेतों की मिटटी में नमी की उपलब्धता एवं बाजार में प्रचलित कीमतों के अनुरूप भारतीय किसान इस वर्ष रबी फसलों का चयन सोच-समझकर कर रहे हैं जिससे कुछ फसलों की खेती को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है जबकि कुछ फसलों पर कम ध्यान दिया जा रहा है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि शुरूआती रुझान में धान, मक्का एवं ज्वार का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से पीछे है जबकि दलहन-तिलहन फसलों एवं गेहूं की खेती में किसान काफी रूचि दिखा रहे हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष 31 अक्टूबर तक रबी फसलों का सकल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 75.78 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 65.88 लाख हेक्टेयर से 9.90 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि 2025-26 के लिए रबी फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 637.80 लाख हेक्टेयर आंका गया है।
पिछले साल के मुकाबले चालू रबी सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं का उत्पादन क्षेत्र 2.28 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.34 लाख हेक्टेयर, दलहनों का बिजाई क्षेत्र 16.50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 20.77 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का रकबा 5.17 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 5.62 लाख हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 37.42 लाख हेक्टेयर से उछलकर 42.33 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
उम्मीद के अनुरूप सरसों, चना, गेहूं, जौ एवं मसूर के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। दूसरी ओर धान का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 4.51 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 3.71 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
दलहन फसलों में चना का उत्पादन क्षेत्र 12.15 लाख हेक्टेयर से उछलकर 14.92 लाख हेक्टेयर, मसूर का बिजाई क्षेत्र 1.89 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.56 लाख हेक्टेयर तथा मटर का क्षेत्रफल 1.74 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 2.16 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। कुलथी एवं उड़द के रकबे में भी अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है। कुछ क्षेत्रों में मूंग एवं खेसारी की बिजाई भी आरंभ हो गई है।
तिलहन फसलों में सरसों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 36.73 लाख हेक्टेयर से उछलकर इस बार 41.69 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जबकि मूंगफली एवं अलसी की बिजाई कुछ पीछे चल रही है। अन्य तिलहनों की बिजाई अभी शुरू ही हुई है।
मोटे अनाजों में ज्वार का रकबा 2.78 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 2.70 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 2.17 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.10 लाख हेक्टेयर रह गया मगर जौ का बिजाई क्षेत्र 11 हजार हेक्टेयर से उछलकर 47 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। रबी फसलों की बिजाई लम्बे समय तक जारी रहेगी और इसके क्षेत्रफल का दायरा अनवरत बढ़ता रहेगा।
