रबीकालीन फसलों के समर्थन मूल्य में कम बढ़ोत्तरी होने की सम्भावना

07-Oct-2024 04:46 PM

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा इस बार 2020-25 के रबी सीजन की फसलों - गेहूं, जौ, चना, मसूर तथा सरसों के न्यूनतम सर्मथन मूल्य (एमएसपी) में विगत वर्षों के मुकाबले कम बढ़ोत्तरी किए जाने की सम्भावना है। मोटे अनुमान के मुताबिक बाजार में उपलब्धता एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रचलित कीमतों को ध्यान में रखते हुए सरकार गेहूं का एमएसपी करीब 5 प्रतिशत बढ़ाकर 2400 रुपए प्रति क्विंटल नियत कर सकती है जो 2023-24 सीजन के समर्थन मूल्य 2275 रुपए प्रति क्विंटल आ रही है और घरेलू प्रभाग में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम बनी हुई है। उधर वैश्विक बाजार में गेहूं का भाव नरम चल रहा है। ये सारे कारक गेहूं के एमएसपी के निर्धारण पर असर डाल सकते हैं। मालूम हो कि 2022-23 की तुलना में 2023-24 सीजन के दौरान गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया गया था।

हाल ही में केंद्रीय खाद्य सचिव ने यह कहते हुए खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के स्टॉक से बल्क खरीदारों के लिए साप्ताहिक ई-नीलामी के जरिए गेहूं की बिक्री शुरू करने की सम्भावना से इंकार किया था कि देश में 2023-24 सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन बढ़कर 1132.80 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया जो 2022-23 सीजन के उत्पादन से 2.4 प्रतिशत अधिक रहा। खाद्य निगम के पास अभी 238.50 लाख टन गेहूं का स्टॉक है जो न्यूनतम आवश्यक बफर स्टॉक 205.20 लाख टन से ज्याद है। हालाँकि सरकार ने ओएमएसएस के तहत बिक्री के लिए 25 लाख टन गेहूं का आवंटन किया है लेकिन इसकी बिक्री तभी शुरू की जाएगी जब ऐसा करना आवश्यक समझा जाएगा।

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश के आधार पर केंद्रीय कैबिनेट द्वारा शीघ्र ही रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा किए जाने की उम्मीद है। दलहन-तिलहन फसलों के समर्थन मूल्य में भी सामान्य बढ़ोत्तरी हो सकती है। इन फसलों के एमएसपी में पहले ही भारी इजाफा किया जा चुका है।