राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन का लक्ष्य तक पहुंचना आवश्यक

26-Dec-2025 09:18 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल- तिलहन मिशन को सक्रिय करते हुए इसकी विभिन्न स्कीमों पर काम करना शुरू कर दिया है। इस मिशन के अंतर्गत विदेशों से खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता को 57 प्रतिशत के वर्तमान स्तर से घटाकर अगले छह-सात वर्षों में 28 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।

उद्योग-व्यापार समीक्षकों का कहना है कि इस मिशन का अपने लक्ष्य तक पहुंचना अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि देश में खाद्य तेलों की मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती जा रही है मगर इसके अनुरूप तिलहन का उत्पादन नहीं बढ़ रहा है। 

भारत संसार में तिलहन-तेल की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था वाला देश है जबकि खाद्य तेलों के आयात में दुनिया में नंबर वन पोजीशन पर बरकरार है।

यहां प्रति वर्ष विशाल मात्रा में इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड से पाम तेल, अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से सोयाबीन तेल तथा रूस, यूक्रेन एवं अर्जेंटीना से सूरजमुखी तेल का आयात किया जाता है। 

भारत में तिलहनों का उत्पादन बढ़ाने के रास्ते में अनेक चुनौतियां एवं बाधाएं है जिसे इस मिशन के अंतर्गत दूर करने का प्रयास किया जाएगा। तिलहन फसलों के बढ़ते लागत खर्च के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तो बढ़ाया जाता है लेकिन इस मूल्य पर तिलहनों की पर्याप्त सरकारी खरीद नहीं होती है।

इसके फलस्वरूप किसानों को अपने उत्पादों का लाभप्रद मूल्य हासिल करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ता है। सोयाबीन इसका एक ज्वलंत उदाहरण है जिसका थोक मंडी भाव लम्बे समय से न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है।

मूंगफली के दाम में भी पहले गिरावट आई थी मगर अब इसमें सुधार आने लगा है। इसी तरह सरसों का भाव मार्च अप्रैल 2025 में नई फसल की जोरदार आवक के समय घटकर एमएसपी से नीचे आया था लेकिन मई से बाजार तेज होने लगा।

तिलहनों का भाव एमएसपी से ऊपर रखने के लिए सरकार को खाद्य तेल के तेजी से बढ़ते आयात पर अंकुश लगाने का गंभीर प्रयास करना होगा।