सीमा शुल्क की समाप्ति के बाद रूई के आयात में भारी वृद्धि

22-Dec-2025 11:02 AM

भटिंडा। विदेशों से रूई के आयात पर पहले 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ था लेकिन 19 अगस्त 2025 को सरकार ने एक अधिसूचना जारी करके इसे समाप्त कर दिया।

इससे देश में रूई का आयात तेजी से बढ़ने लगा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाव नीचे होने से भी आयातकों को इसकी विशाल मात्रा का आयात करने का प्रोत्साहन मिला।

हालांकि देश की अधिकांश थोक मंडियों में कपास के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहा है लेकिन फिर भी विदेशों से इसका आयात करना आर्थिक दृष्टि से लाभप्रद साबित हो रहा है।

2023-24 के मार्केटिंग सीजन में देश के अंदर 13.20 लाख गांठ रूई का आयात हुआ था जो 2024-25 के सीजन में उछलकर 41.40 लाख गांठ पर पहुंच गया। कपास की प्रत्येक गांठ 170 किलो की होती है।

विशाल मात्रा में विदेशों से सस्ती रूई का आयात होने से घरेलू प्रभाग में भाव 57,000 रुपए प्रति कैंडी से घटकर 52,000 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) पर आ गया इससे किसानों की आमदनी प्रभावित होने लगी है और संघों-संगठनों द्वारा सरकार ने बाजार में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की जाने लगी।

ध्यान देने की बात है कि जब रूई पर आयात शुल्क को समाप्त करने का निर्णय लिया गया था तब भी किसान संगठनों द्वारा उसका विरोध किया गया था लेकिन ऊंचे अमरीकी टैरिफ के दुष्प्रभाव से स्वदेशी टेक्सटाइल उद्योग को बचाने के लिए सरकार को वह कदम उठाना पड़ा था। 

भारतीय किसानों को उसके उत्पाद की लाभप्रद वापसी सुनिश्चित करने के लिए सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास की जोरदार खरीद की जा रही है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन में 1 अक्टूबर से 8 दिसम्बर 2025 के दौरान निमग द्वारा 24.92 लाख गांठ कपास की खरीद की गई जो 292 लाख गांठ के कुल अनुमानित उत्पादन का 8.53 प्रतिशत है।

2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में निगम द्वारा करीब 100 लाख गांठ कपास की खरीद की गई थी। खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है।