साप्ताहिक समीक्षा- चीनी

11-Oct-2025 07:17 PM

बिकवाली के दबाव से चीनी में नरमी 

नई दिल्ली। पीक त्यौहारी सीजन जारी रहने के बावजूद 4 से 10 अक्टूबर वाले सप्ताह के दौरान चीनी के मिल डिलीवरी मूल्य एवं हाजिर बाजार भाव में 40-50 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई। मिलों द्वारा बिकवाली का दबाव बढ़ाया गया मगर इसके मुकाबले खरीदारों की मांग कमजोर रही।

मिल डिलीवरी भाव  

समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान चीनी के मिल डिलीवरी मूल्य में पूर्वी उत्तर प्रदेश में 30 रुपए प्रति क्विंटल पश्चिमी उत्तर प्रदेश  में 50 रुपए, पंजाब में 41 रुपए, मध्य प्रदेश में 15 रुपए तथा बिहार में 64 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई।  

गुजरात 

गुजरात में भी 15 से 30 रुपए तक की नरमी रही। मिलों को उम्मीद के अनुरूप चीनी बेचने में सफलता नहीं मिल सकी। दुर्गापूजा (दशहरा) का त्यौहार अक्टूबर को समाप्त होने के बाद चीनी में दीपावली की मांग निकलने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन खरीदारों को पता है कि अक्टूबर के लिए 24 लाख टन चीनी का फ्री सेल कोटा नियत किया गया है इसलिए इसके अभाव का संकट नहीं रहेगा और सही समय पर खरीद के लिए इसका पर्याप्त स्टॉक मौजूद रहेगा।

हाजिर भाव  

चीनी का हाजिर बाजार भाव इसी अवधि के दौरान दिल्ली में 30 रुपए गिरकर 4400/4600 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। हालांकि इंदौर में यह 4270/4340 रुपए प्रति क्विंटल के पिछले स्तर पर स्थिर रहा मगर रायपुर (छत्तीसगढ़) में 20 रुपए गिरकर 4260/4350 रुपए प्रति क्विंटल, कोलकाता में 30 रुपए घटकर 4320/4420 रुपए प्रति क्विंटल तथा मुम्बई (वाशी) मार्केट में 20 रुपए गिरकर 3980/4180 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। चीनी का नाका पोर्ट डिलीवरी मूल्य भी 20 रुपए की गिरावट के साथ 3930/4130 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। लगभग सभी क्षेत्रों में इसके कारोबार की गति धीमी रही। 

टेंडर 

महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी के टेंडर मूल्य में करीब 45 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आई और मिलर्स को दाम घटाकर अपना स्टॉक बेचना पड़ा। अब दीपावली का बड़ा त्यौहार नजदीक आ गया है इसलिए चीनी की मांग एवं कीमत आगामी दिनों में मजबूत हो सकती है। विदेशों में चीनी का बाजार ठंडा पड़ गया है। 

उत्पादन अनुमान 

इधर घरेल प्रभाग में 2025-26 सीजन के दौरान इस्मा ने 349 लाख टन तथा केन्द्र सरकार ने 340 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया है। गन्ना के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन कहीं-कहीं अधिशेष वर्षा एवं बाढ़ से फसल को थोड़ा-बहुत नुकसान भी हुआ है।